Ranchi- कांग्रेस और झामुमो के बीच की जिच महुआ माजी का नॉमिनेशन करने के वक्त भी दिखी. बगैर कांग्रेसी विधायकों की उपस्थिति के नॉमिनेशन की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी. मौके पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो, झामुमो महासचिवा सुप्रियो भट्टाचार्ज के साथी ही कई मंत्री, विधायक मौजूद रहें. यहां बता दें कि संख्या बल के हिसाब से महुआ माजी की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है. लेकिन यदी कांग्रेस इस जिच के बाद कोई बड़ा फैसला लेती है तो सरकार के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो सकता है.
महुआ माजी का नॉमिनेशन से उभरते सवाल
इस बीच प्रदेश कांग्रेस प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे भी रांची पहुंच चुके हैं, कांग्रेस कार्यालय में वन टू वन विधायकों को बुलाकर वर्तमान हालात पर उनकी राय ली जा रही है, लेकिन बड़ा सवाल फिर से वहीं है कि क्या कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने तक जाएगी, क्या वह सरकार से समर्थन वापसी का फैसला ले सकेगी, क्या यह निर्णय प्रदेश कांग्रेस के स्तर से लिया जा सकता है, यदि प्रदेश कांग्रेस सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला कर भी लेती है तो क्या सोनिया गांधी की सहमति इस पर बनेगी.या कुल मिलाकर कांग्रेसी विधायकों को किसी प्रकार से वर्तमान हालात से अवगत करवाते हुए मनाने की कवायद है. क्योंकि बगैर झामुमो के समर्थन के कांग्रेस का पास झारखंड में इतनी जमीन तो बची नहीं है, कि वह अपने बलबुते वापस आये.
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