रांची के RIMS 2 जमीन विवाद में 85 ग्रामीणों पर FIR से आक्रोश, आदिवासी संगठनों ने कहा– FIR वापस नहीं हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन।
रांची : नगरी इलाके में प्रस्तावित RIMS 2 जमीन विवाद एक बार फिर गरमा गया है। चंपाई सोरेन की अगुवाई में हुए रोपाई कार्यक्रम के बाद प्रशासन ने 85 ग्रामीणों पर FIR दर्ज कर दी। इस कार्रवाई से ग्रामीणों और आदिवासी संगठनों में गहरी नाराजगी है।
ग्रामीणों का कहना है कि FIR में उन लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं जो घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे। यहां तक कि कई बुजुर्ग पुरुष और महिलाएं, जो घर पर थे, उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सरकार द्वारा प्रायोजित FIR है, जिसका उद्देश्य आंदोलन को दबाना है।
Key Highlights:
RIMS 2 जमीन विवाद में 85 ग्रामीणों पर FIR दर्ज
ग्रामीणों का आरोप– बूढ़े-बुजुर्ग और आंदोलन में शामिल न रहे लोग भी FIR में शामिल
मीडिया कवरेज रोके जाने पर नाराजगी, सरकार पर आंदोलन दबाने का आरोप
ग्रामीणों ने चेताया– FIR वापस नहीं हुआ तो वृहद आंदोलन होगा
आदिवासी संगठनों का दावा– यह आधुनिक दौर का सबसे बड़ा भूमि बचाओ आंदोलन
स्थानीय लोगों ने मीडिया को भी रोके जाने पर सवाल उठाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मीडिया को आंदोलन में प्रवेश की अनुमति दी जाती तो सच्चाई सामने आ जाती। उनका आरोप है कि प्रशासन ने न केवल मीडिया को रोका बल्कि कई पत्रकारों को हिरासत में भी लिया।
आंदोलनकारी ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर FIR वापस नहीं ली गई तो आने वाले दिनों में और बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक आंदोलन नहीं है बल्कि आदिवासी समाज की भूमि, जल और जंगल की रक्षा का आंदोलन है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यह बीजेपी का प्रायोजित कार्यक्रम नहीं था बल्कि पूरी तरह से जन भावना से उपजा आंदोलन था। उन्होंने दावा किया कि चंपाई सोरेन जैसे बड़े आदिवासी नेता इसमें इसलिए शामिल हुए क्योंकि यह उनकी जमीन और अस्तित्व की लड़ाई है, न कि किसी पार्टी का एजेंडा।
स्थानीय संगठनों ने इसे आधुनिक दौर का सबसे बड़ा भूमि बचाओ आंदोलन बताया है। उनका कहना है कि इतिहास गवाह है कि जब-जब जमीन और अस्तित्व पर संकट आया, आदिवासी समाज एकजुट होकर लड़ा।
अब देखने वाली बात होगी कि सरकार इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती है या फिर आने वाले दिनों में नगरी क्षेत्र एक और बड़े आंदोलन का गवाह बनेगा।
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