RTE Admission 2026: रांची में गरीब बच्चों की 517 सीटें खाली, बड़े School की चाहत बनी वजह

 रांची में आरटीई के तहत निजी स्कूलों की 1158 आरक्षित सीटों में से केवल 641 पर ही नामांकन हो सका। 517 सीटें खाली रह गईं, 28 स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं आया।


RTE Admission 2026 रांची: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना का लाभ इस वर्ष भी सभी पात्र बच्चों तक नहीं पहुंच सका। रांची जिले में आरटीई के तहत आरक्षित 1158 सीटों में से केवल 641 सीटों पर ही नामांकन हो पाया, जबकि 517 सीटें खाली रह गईं।

जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नामांकन के लिए कुल 1036 छात्र-छात्राओं का चयन लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से किया गया था, लेकिन बड़ी संख्या में अभिभावकों ने अंतिम चरण तक नामांकन प्रक्रिया पूरी नहीं की। इसका सीधा असर सीटों की उपलब्धता पर पड़ा और सैकड़ों सीटें खाली रह गईं।

RTE Admission 2026:117 निजी स्कूलों में आरक्षित थीं 1158 सीटें

रांची जिले के 117 निजी विद्यालयों में आरटीई के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 1158 सीटें आरक्षित की गई थीं। इन सीटों पर प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन और लॉटरी प्रक्रिया आयोजित की गई थी। चयनित विद्यार्थियों में से केवल 641 बच्चों का ही प्रवेश सुनिश्चित हो पाया।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि चयनित अभिभावक समय पर नामांकन प्रक्रिया पूरी करते तो अधिकांश सीटें भर सकती थीं। लेकिन कई अभिभावकों ने दस्तावेज सत्यापन और प्रवेश की औपचारिकताएं पूरी नहीं कीं।

RTE Admission 2026:28 स्कूलों में नहीं आया एक भी आवेदन

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिले के 117 सूचीबद्ध निजी स्कूलों में से 28 स्कूल ऐसे रहे, जहां आरटीई के तहत नामांकन के लिए एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ। इसके कारण इन विद्यालयों की सभी आरक्षित सीटें खाली रह गईं।

अधिकारियों के अनुसार अधिकांश अभिभावकों ने अपने बच्चों का प्रवेश बड़े, प्रतिष्ठित और चर्चित निजी विद्यालयों में कराने को प्राथमिकता दी। परिणामस्वरूप कुछ चुनिंदा स्कूलों में आवेदन की संख्या काफी अधिक रही, जबकि कई स्थानीय विद्यालय पूरी तरह उपेक्षित रह गए।


Key Highlights

  • रांची में आरटीई के तहत 1158 सीटें थीं आरक्षित।

  • केवल 641 बच्चों का ही हो सका नामांकन।

  • 517 सीटें खाली रह गईं।

  • 28 निजी स्कूलों में एक भी आवेदन नहीं आया।

  • बड़े और नामी स्कूलों की चाहत से कई सीटें खाली रह गईं।


RTE Admission 2026:बड़े स्कूलों की चाहत से चूक गये कई अभिभावक

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि बड़े और नामी स्कूलों में प्रवेश की उम्मीद ने कई अभिभावकों को नुकसान पहुंचाया। जिन बच्चों का चयन लोकप्रिय स्कूलों में नहीं हो सका, उनके अभिभावकों ने आसपास उपलब्ध अन्य विद्यालयों में नामांकन कराने का विकल्प नहीं चुना।

इस कारण जहां एक ओर कई स्कूलों में सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा रही, वहीं दूसरी ओर अनेक विद्यालयों में सीटें खाली रह गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि आरटीई योजना का पूर्ण लाभ सुनिश्चित करने के लिए अभिभावकों में जागरूकता बढ़ाने और सभी सूचीबद्ध विद्यालयों के प्रति भरोसा विकसित करने की आवश्यकता है।

RTE Admission 2026:प्रशासन बढ़ाएगा जागरूकता अभियान

शिक्षा विभाग अब अगले शैक्षणिक सत्र के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अभिभावकों को यह समझाने की जरूरत है कि आरटीई का उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ना है, न कि केवल चुनिंदा बड़े स्कूलों तक सीमित रखना।

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