कुड़मी को आदिवासी का दर्जा दिये जाने पर छात्र नेता जयराम महतो का बयान

छात्र नेता जयराम महतो ने झारखंड ज्वलंत मुद्दों को सुलझाने के लिए सामाजिक संगठन का निर्माण करने की बात की है, उन्होंने कहा कि फिलहाल वह राजनीतिक संगठन का निर्माण करने नहीं जा रहे हैं, उनकी कोशिश झारखंड के ज्वलंत राजनीतिक सामाजिक मुद्दों पर आन्दोलन खड़ा कर सत्ता और व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने की है, जिसके कि व्यापक जनसमुदाय के जीवन में गुणात्मक सुधार हो.

Ranchi- कुड़मी को आदिवासी समुदाय का दर्जा देने की मांग- भगत सिंह के बयानों को उधृत करते हुए छात्र नेता जयराम महतो ने कहा कि भगत सिंह ने भी कहा था कि हम गोरे अंग्रेजों से लड़ाई लड़ कर राजनीतिक आन्दोलन प्राप्त कर लेंगे, लेकिन हमें असली खतरा काला काले अंग्रेजों से है, हमारे हक हकूक की लूट गोरे अंग्रेज नहीं बल्कि इन काले अंग्रेजों के द्वारा किया जा रहा है. जयराम महतो ने कहा है कि आज भी हम उसी मुकाम पर खड़े हैं, आज भी हमारे शोषक ये काले अंग्रेज ही है, आज भी हमें मुक्ति की जरुरत है, आज भी हमारी लड़ाई अधूरी है, यही कारण है कि हम राजनीतिक संगठन की जगह सामाजिक संगठन को खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं.

कुड़मी को आदिवासी समुदाय का दर्जा देने की मांग पर जयराम महतो का जवाब

कुड़मी को आदिवासी समुदाय का दर्जा दिये जाने के सवाल पर जयराम महतो ने कहा कि

वैसे तो इसका फैसला इतिहासकार करेंगे, लेकिन एक बात तो साफ है

कि यदि धान की खेती नयी है तो कुड़मी इस धरती में नये हैं,

लेकिन यदि झारखंड में धान की खेती पुरानी है तो कुड़मी भी इस भूभाग के सबसे पुराने निवासी है,

कुड़मियों का संबंध धान की खेती से है,

दामोदर नदी के दोनों तरह कुड़मियों की आबादी है,

यही साबित करने के लिए पर्याप्त है कि कुड़मी कितने पुराने निवासी है.

वैसै कुड़मी आदिवासी हैं या नहीं इसका फैसला इतिहासकारों का है. मे

रा इस मामले में कोई खास अध्ययन नहीं है,

जयराम महतो ने कहा हम इन चीजों को समझने की कोशिश कर रहे हैं.

JPSC और JSSC की सभी नियुक्तियों में उम्र सीमा में पांच वर्ष की छूट की मांग

Similar Posts