रांची: झारखंड में अब खुदरा शराब की दुकानों का संचालन सरकार अपने हाथ में लेगी। राज्य के मद्य निषेध एवं उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि 30 जून के बाद प्लेसमेंट एजेंसियों को संचालन से मुक्त कर दिया जाएगा, और 1 जुलाई से खुदरा दुकानें सरकार के नियंत्रण में रहेंगी। नई उत्पाद नीति लागू होने तक यह व्यवस्था जारी रहेगी।
मंत्री ने कहा कि इस अंतरिम व्यवस्था के लिए कैबिनेट से अनुमति ली जाएगी और एक व्यापक प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। सेल्समैन की नियुक्ति, संचालन पद्धति जैसे मसलों को शामिल करते हुए सरकारी तंत्र द्वारा ही दुकानें चलाई जाएंगी।
नई उत्पाद नीति में हो रही देरी, अफसरों की कमी बनी बाधा
मंत्री ने यह भी बताया कि नई उत्पाद नीति को लागू करने में देरी हो रही है क्योंकि विभाग में कुशल अधिकारियों की कमी है। लंबे समय से उत्पाद आयुक्त पद रिक्त है, और कुछ विभागीय अधिकारी वर्तमान में न्यायिक प्रक्रिया में उलझे हुए हैं। इसके चलते नीति लागू करने की प्रक्रियाएं अटक गई हैं।
उन्होंने बताया कि नई नीति के तहत करीब 1500 खुदरा शराब दुकानें निजी हाथों को दी जाएंगी, जिनका आवंटन ई-लॉटरी के माध्यम से होगा। जबकि थोक बिक्री की व्यवस्था पहले की तरह झारखंड स्टेट बेवरेज कॉरपोरेशन के ही हाथों में रहेगी।
प्रक्रियाओं में लगेंगे दो से तीन महीने
निविदा प्रक्रिया में कम-से-कम 45 दिन का समय लगता है। इसलिए नई नीति लागू होने में लगभग दो से तीन महीने का समय लग सकता है। इस अंतराल में सरकार ही दुकानें संचालित करेगी ताकि 1 जुलाई से शराब बिक्री प्रभावित न हो।
उत्पाद मंत्री ने बताया कि 16 जून के बाद उत्पाद आयुक्त के रांची लौटने की उम्मीद है, जिसके बाद नीति लागू करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी।


















