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जिस प्लास्टिक को समझते थे कचरा, अब उसी से बन रहीं मजबूत ग्रामीण सड़कें

पटना : ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि घर-घर से निकलने वाला सिंगल यूज प्लास्टिक अब कचरे का हिस्सा न होकर ग्रामीण सड़कों की मजबूती बढ़ा रहा है। यह लाइलाज समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण सड़क निर्माण का महत्वपूर्ण अवयवों में शामिल हो गया है। यह सफलता ग्रामीण विकास विभाग की ओर से चलाए गए लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (LSBA) के तहत डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के बाद मिली है। ग्रामीण कार्य विभाग के सहयोग से घरों से निकलने वाले प्लास्टिक कचरे का प्रसंस्करण कर राज्य के तीन जिलों में करीब 10 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जा चुकी है। आने वाले समय में अन्य जिलों में भी इस नवाचार को लागू करने की योजना चल रही है।

ग्रामीण विकास विभाग की ओर से चलाए जा रहे लोहिया स्वच्छ अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में डोर-टू-डोर कचरे का कलेक्शन किया जा रहा है – मंत्री श्रवण कुमार

ग्रामीण विकास विभाग की ओर से चलाए जा रहे लोहिया स्वच्छ अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में डोर-टू-डोर कचरे का कलेक्शन किया जा रहा है। इस कचरे में शामिल घरों से निकलने वाले सिंगल यूज प्लास्टिक को राज्य में स्थापित कुल 171 प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई पर पहुंचाया जा रहा है। इन इकाइयों पर प्लास्टिक का प्रसंस्करण कर वेस्ट को ग्रामीण कार्य विभाग को दिया जा रहा है।

Mantri S Kumar 1 22Scope News

ग्रामीण कार्य विभाग इस वेस्ट को तारकोल के साथ मिलाकर गांवों में मजबूत और टिकाऊ सड़क का निर्माण कर रहा है – मंत्री

ग्रामीण कार्य विभाग इस वेस्ट को तारकोल के साथ मिलाकर गांवों में मजबूत और टिकाऊ सड़क का निर्माण कर रहा है। अभी तक राज्य के प्रमुख तीन जिलों पूर्णिया, खगड़िया और औरंगाबाद में करीब आठ मीट्रिक टन प्लास्टिक अवशेष से 10.5 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जा चुका है। आने वाले समय में अन्य दूसरे जिलों में भी प्लास्टिक अवशेष से कई गुना टिकाऊ और दीर्घकालिक सड़क बनाने की योजना है।

पर्यावरण भी सुरक्षित, सड़कें भी मजबूत

खगड़िया, सड़क की लंबाई-एक किमी, उपयोग प्लास्टिक अपशिष्ट-एक मीट्रिक टन
पूर्णिया, सड़क की लंबाई-4.05 किमी, उपयोग प्लास्टिक अपशिष्ट-3.08 मीट्रिक टन
औरंगाबाद, सड़क की लंबाई-पांच किमी, उपयोग प्लास्टिक अपशिष्ट-3.5 मीट्रिक टन

स्वच्छता से सड़क तक की कहानी

लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के राज्य सलाहकार रतनीश वर्मा बताते हैं कि कम व उच्च घनत्व वाले प्लास्टिक, पेट बोतल आदि की कतरन को गर्म डामर के साथ सात प्रतिशत के अनुपात में मिलाया जाता है। इससे बनने वाली सड़कों की गुणवत्ता काफी अधिक होती है। इसकी एक मुख्य वजह यह है कि इन सड़कों पर जल जमाव से कोई नुकसान नहीं होता। इसी वजह से इनकी आयु पारंपरिक सड़कों की अपेक्षा कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि अभियान प्लास्टिक प्रबंधन और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एक विशिष्ट पहल है।

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पर्यावरण सुरक्षा व टिकाऊ बुनियादी ढांचे के लिए प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल ग्रामीण सड़कों के निर्माण में किया जा रहा है – श्रवण कुमार

पर्यावरण सुरक्षा और टिकाऊ बुनियादी ढांचे के लिए प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल ग्रामीण सड़कों के निर्माण में किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जलजमाव वाले क्षेत्रों में सड़कों को अधिक मजबूत बनाना है। साथ ही प्लास्टिक कचरे का सही निष्पादन करते हुए पर्यावरण प्रदूषण को कम करना है। आने वाले समय में दूसरे जिलों में भी प्लास्टिक अवशेष से निर्मित मजबूत और टिकाऊ सड़क बनाने की योजना है। इसे जल्द ही लागू किया जाएगा।

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