RANCHI: साल 2022 आया तो था शरीफ बच्चे की तरह लेकिन जाते-जाते धमाल मचा गया शरारती बच्चे की तरह. हम बात झारखंड की राजनीति की कर रहे हैं जो बेहद रोचक और रोमांचक दौर से गुजर रही है. झारखंड के 22 साल के सफर में साल 2022 अपनी अमिट छाप छोड़ गया.

जाते- जाते 2022 राजनितिक बवंडर खड़ा कर इतिहास लिख गया
हालांकि 2022 का आगमन हुआ तब शायद ही किसी को इस बात का आभास रहा होगा कि बिल्कुल सहज-शांत तरीके से आनेवाला ये साल जाते-जाते राजनैतिक बवंडर खड़ा कर इतिहास लिख जाएगा. तीन साल पहले हेमंत सोरेन के नेतृत्व में जब गठबंधन सरकार बनी तो उसे पर्याप्त बहुमत हासिल था. सदन के भीतर संख्या बल की कोई कमी नहीं थी इसलिए सरकार के उपर किसी तरह का संकट भी नहीं दिख रहा था. लेकिन मई 2022 आते-आते अचानक से राजनैतिक परिदृश्य बदलने लगा.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर घोटालों के कई गंभीर आरोप लगे

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर घोटालों के कई गंभीर आरोप लगे. मामले की जांच शुरू हुई तो ईडी की भी एंट्री हो गई. इसके साथ ही मुख्यमंत्री के विधानसभा सदस्यता पर भी संशय के बादल मंडराने लगे. ऐसा लगा मानो अचानक से बवंडर आ गया.देखते ही देखते सत्ता की राजनीति थरथराने लगी. विपक्ष अक्रामक हुआ और सरकार सुस्त पड़ती दिखी. इसका सीधा असर प्रशासनिक काम-काज पर भी पड़ा.
सत्ताधारी गठबंधन के विधायक सुबह-शाम सीएम आवास हाजिरी लगाने पहुंचने लगे. वहां उनका अट्डेंस होता था. इसके बाद झारखंड में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की एंट्री हुई. यहां पहली बार ऐसा हुआ कि हेलीकॉप्टर भी बुक किया गया और विधायकों को बसों में भरकर पहले एयरपोर्ट और फिर वहां से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर ले जाया गया. कई दिनों तक रायपुर के एक रिसॉर्ट में विधायकों को रखा गया.
राष्ट्रीय मीडिया में लाइमलाइट में आया झारखण्ड

इस घटनाक्रम के साथ ही राष्ट्रीय मीडिया में ज्यादातर मौकों पर नेपथ्य में रहने वाला झारखंड, अचानक लाइम लाइट में आ गया. कुछ वक्त के लिए देश भर का पॉलिटिकल अटेंशन रांची में शिफ्ट हो गया. हालांकि बाद में विधायक लौट आए, सरकार भी बनी हुई है लेकिन शह और मात का खेल जारी है. इन तमाम घटनाक्रमों के बीच काफी समय तक राजभवन भी चर्चा के केंद्र में रहा. दरअसल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लाभ के पद के दुरुपयोग के मामले में निर्वाचन आयोग ने राज्यपाल को अपनी रिपोर्ट भेजी. लेकिन लिफाफे के भीतर क्या है ये अबतक राज बना हुआ है. जाहिर है इसको लेकर अब भी सरकार में संशय की स्थिति बनी हुई है.
कांग्रेस के तीन विधायक कोलकाता में कैश के साथ पकडे गए
इसी दौरान पहली बार झारखंड में एक और बड़ी राजनैतिक घटना घटी. कांग्रेस के तीन विधायकों को कोलकाता में कैश के साथ गिरफ्तार किया गया और अपनी ही पार्टी को तोड़ने और सरकार को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगा.
तमाम घटनाक्रमों के बीच अस्तित्व संकट गहराता दिखा
तो सरकार ने 1932 खतियान और स्थानीयता का मिसाइल दाग दिया.
इसे लागू करने की घोषणा के साथ ही पासा पलटता दिखा.
इन फैसलों का गहरा राजनैतिक सामाजिक प्रभाव पड़ा.
सरकार बैकफूट से फ्रंटफूट पर आती दिखी.
अब सरकार इसे लागू कर पाएगी या इसका भी
हश्र नियोजन नीति की तरह हो जाएगा, ये तो वक्त बताएगा,
लेकिन फिलहाल तो हेमंत सरकार के लिए ये किसी रक्षा कवच
की तरह काम करता दिख रहा है. तो क्या साल बदलने के साथ
सरकार का संकट भी टलेगा ? जवाब जानने के लिए कहीं
और जाने की जरूरत नहीं है. बकौल झारखंड मुक्ति मोर्चा के
वरिष्ठ नेता और पार्टी महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य – 2023
राजनीतिक तौर पर बेहद चुनौतीपूर्ण है क्योंकि
बीजेपी लगातार सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है.
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