रांचीः World Day Against Child Labour – बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस लोगों में जागरुकता बढ़ाने और बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए हर साल 12 जून को मनाया जाता है. बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस (विश्व बाल श्रम निषेध दिवस) का प्राथमिक उद्देश्य बाल श्रमिकों की दुर्दशा को उजागर करना और विश्व स्तर पर बाल श्रम को खत्म करने के प्रयासों को बढ़ावा देना है. इस साल विश्व बाल श्रम निषेध दिवस (World Day Against Child Labour) की थीम “सभी के लिए सामाजिक न्याय, बाल श्रम का खात्मा!” (Social Justice for All, End Child Labour!) है.
World Day Against Child Labour – 152 मिलियन बच्चे करते हैं मजदूरी
रिसर्च के अनुसार विश्व स्तर पर हर दस में से एक बच्चा काम करने के लिए मजबूर है. साल 2000 के बाद से इसकी कुल संख्या में कमी आई है, पिछले वर्षों में कमी की गति भी दो-तिहाई धीमी हो गई है. इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 152 मिलियन बच्चे बाल श्रम में लगे हुए हैं, जिनमें से 72 मिलियन बच्चे खतरनाक परिस्थितियों में काम करते हैं.
World Day Against Child Labour – बाल श्रम को रोके बिना तरक्की अधूरी है
सोशल एक्टिविस्ट बैद्दनाथ कुमार ने कहा कि बाल श्रम विकसित भारत के माथे पर एक अभिशाप है. बाल श्रम को अगर मिटाना है, तो इसकी शुरुआत हमें अपने घर, समाज और मुहल्ले से करना होगा. जिस प्रतिस्ठान में बाल मजदूर काम करते हैं, उस प्रतिसठान का हमे विरोध करना चाहिए. आज नवयुवक बेरोजगारी की जिंदगी जी रहे हैं और 1 करोड़ से ज्यादा बच्चे बाल मजदूर का कार्य कर रहे हैं. बाल मजदूरी जिस दिन खत्म होगा उस दिन 1करोड़ लोगों को रोजगार मिलेगा.

सोशल एक्टिविस्ट बैद्दनाथ कुमार
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस का महत्व
बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस व्यक्तियों, समुदायों और सरकारों को बच्चों की रक्षा करने और एक ऐसी दुनिया बनाने की उनकी जिम्मेदारी के लिए याद दिलाने का काम करता है, जहां हर बच्चा एक सुरक्षित और पोषण वाले वातावरण में विकसित हो सकता है. यह बाल श्रम को खत्म करने के लिए सहयोग और सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल देता है और बच्चों को वे अवसर प्रदान करता है जिससे वे बेहतर भविष्य के हकदार बन सकें.
क्या है बाल श्रम
बाल श्रम से तात्पर्य ऐसे काम से है जो बच्चों के लिए मानसिक, शारीरिक, सामाजिक या नैतिक रूप से हानिकारक हो और उनकी शिक्षा में बाधा उत्पन्न करता हो. यह बच्चों को उनके बचपन, उनकी क्षमता और उनकी गरिमा से वंचित करता है और इसे उनके अधिकारों का उल्लंघन माना जाता है.
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस का इतिहास
यूएन की बॉडी इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन (ILO) काम के वैश्विक समुदाय को नियंत्रित करता है, आईएलओ ने 2002 में बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस की स्थापना की. ये 5 से 17 वर्ष की आयु के कई बच्चों को उचित शिक्षा, उपयुक्त चिकित्सा सेवाएं, ख़ाली समय, या केवल मौलिक स्वतंत्रता प्रदान करके एक सामान्य बचपन की गारंटी देता है.
हर साल रखी जाती है अलग थीम
आईएलओ ने बाल श्रम की वैश्विक सीमा और इसे खत्म करने के लिए आवश्यक कार्रवाई और प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए 2002 में बाल श्रम के खिलाफ विश्व दिवस की शुरूआत की थी. विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के मौके पर हर साल नई थीम रखी जाती है. 2021 में इसकी थीम ‘कोरोना वायरस के दौर में बच्चों को बचाना’ रखी गई थी. 2020 में ‘बच्चों को कोविड-19 महामारी’ और 2019 में ‘बच्चों को खेतों में काम नहीं, बल्कि सपनों पर काम करना चाहिए’ थी.
World Day Against Child Labour


















