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By Election: राजनीतिक रणनीतिकार की रणनीति रही कितनी कारगर? महज 40 दिन पुरानी पार्टी…

मंजेश कुमार

पटना: बिहार विधानसभा उपचुनाव (By Election) शनिवार को मतगणना के साथ ही समाप्त हो गया। उपचुनाव में एनडीए गठबंधन ने राजद की तीन सिटिंग सीटों पर भी कब्ज़ा कर लिया। इस उपचुनाव को एक तरफ एनडीए अगले वर्ष विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल कह रहा है तो दूसरी तरफ राजद अभी भी विधानसभा चुनाव में विराट कमबैक का दावा कर रही है। राजद नेता तेजस्वी यादव समेत अन्य नेताओं ने कहा कि यह सेमीफाइनल नहीं था। यह एक उपचुनाव था और उपचुनाव में अक्सर जनता का मूड सत्ताधारी दलों के साथ होता है। असली परीक्षा अगले वर्ष है और अगले वर्ष तेजस्वी की बढ़ती लोकप्रियता का हमें काफी फायदा होगा और हम राज्य में सरकार बनाएंगे।

हालांकि सत्ता के सेमीफाइनल में मतदान से पहले 44 दिन पहले राजनीति में उतरी नई पार्टी जन सुराज ने अपना भले कोई सीट नहीं जीती लेकिन तीन नंबर की पार्टी बन कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि जन सुराज की वजह से ही राजद को अपने पुराने गढ़ को भी गंवाना पड़ा। जन सुराज ने राजद के पारंपरिक सीटों पर और मुस्लिम बहुल इलाकों में अच्छी खासी सेंधमारी की और नतीजा रहा कि राजद की सिटिंग सीट एनडीए के पाले में चली गई।

हालांकि बिहार विधानसभा उपचुनाव में अपनी पार्टी के प्रदर्शन पर जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर ने कहा कि उपचुनाव के परिणाम से हतोत्साहित नहीं बल्कि उत्साहित हैं। उन्हें इस परिणाम से आगे और मेहनत करने की प्रेरणा मिली है और वे अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी और भी अच्छे ढंग से करेंगे। उन्होंने कहा कि पहले चुनाव में दस प्रतिशत वोट प्राप्त करने से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला है जिसका फायदा हम आगामी विधानसभा चुनाव में लेंगे।

सभी विधानसभा में औसत साढ़े सोलह हजार वोट

बिहार विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के प्रत्याशियों ने चार में से तीन सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला दिया। हालांकि रामगढ विधानसभा क्षेत्र में जन सुराज चौथे नंबर पर रही लेकिन अन्य तीन सीटों पर जन सुराज ने राजद के वोट बैंक में अच्छी सेंधमारी की। इमामगंज विधानसभा सीट पर जन सुराज के प्रत्याशी को 37103 वोट मिले तो 1990 से राजद सुरेंद्र यादव की सीट बन चुकी बेलागंज में जन सुराज के प्रत्याशी को 17285 वोट मिले।

बेलागंज में राजद के प्रत्याशी को करीब 21 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा। वहीं रामगढ में जन सुराज को 6513 और तरारी में 5522 वोट मिले। सभी सीटों को मिला कर जन सुराज को औसतन 16605 वोट मिले। जन सुराज को चार विधानसभा सीटों पर कुल दस प्रतिशत वोट प्राप्त हुए।

बदलने पड़े थे दो प्रत्याशी

पार्टी की घोषणा करते ही जन सुराज बिहार विधानसभा उपचुनाव में उतर गई। प्रशांत किशोर ने सभी चार विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार की घोषणा कर दी लेकिन बाद में उन्हें दो सीटों पर अपने उम्मीदवार बदलने भी पड़े थे। जन सुराज के तरारी विधानसभा के प्रत्याशी का नाम स्थानीय वोटर लिस्ट में नहीं रहने के कारण बदलना पड़ा तो बेलागंज के प्रत्याशी का स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया। इन वजहों से दोनों ही जगहों पर पीके ने अपने प्रत्याशी को बदला और मजबूती से चुनाव में उतरे।

परिवारवाद का विरोध आया काम

प्रशांत किशोर ने भले करीब डेढ़ महीने पहले दो अक्टूबर को अपनी पार्टी जन सुराज की घोषणा की लेकिन वे लंबे समय से बिहार के पदयात्रा पर हैं। अपनी पदयात्रा के दौरान वे गांवों में जा कर लोगों से मिल रहे हैं और उन्हें बिहार की अब तक की राजनीति के बारे में बताते हुए अब अपने लिए वोट करने के लिए प्रेरित करते हैं। पीके अपनी यात्रा के दौरान राजद, भाजपा और जदयू समेत अब तक की सभी पार्टियों पर निशाना साधते दिखाई देते रहे हैं लेकिन वे सबसे अधिक हमलावर परिवारवाद पर रहे।

मुस्लिम वोट को साधने में जुटे हैं पीके

प्रशांत किशोर ने अपनी पदयात्रा के शुरुआत से ही एक तरफ जहां परिवारवाद पर हमलावर रहे तो दूसरी तरफ उन्होंने महिला और मुस्लिम वोट को साधने में जुटे रहे। उन्होंने अपनी पार्टी की घोषणा के वक्त भी कहा था कि आगामी विधानसभा चुनाव में वे सभी 243 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे कर उन्होंने पहले ही साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी में महिलाओं और मुस्लिम समेत पिछड़े और अतिपिछड़े को प्राथमिकता दी जाएगी। पीके ने साफ शब्दों में अगले विधानसभा चुनाव में 40-40 सीटों पर मुस्लिम और महिलाओं को उतारने की घोषणा कर दी है।

लालू-तेजस्वी का किया पुरजोर विरोध

प्रशांत किशोर वैसे तो भाजपा, जदयू, कांग्रेस और राजद सभी दलों पर हमलावर रहे और विकास नहीं करने का आरोप लगाते रहे। उन्होंने पहले की सरकारों पर हमला किया तो वर्तमान की केंद्र और राज्य सरकार भी कम हमले नहीं किए। लेकिन इन सब के बीच वे लालू यादव और तेजस्वी यादव समेत उनके परिवार और पार्टी को लेकर खासे रुपए से आक्रामक दिखे। प्रशांत किशोर ने लालू -राबड़ी के कार्यकाल की याद दिला कर भी लोगों को अपने पक्ष में करने की कोशिश की।

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