प्रयागराज : महाकुंभ 2025 में 27 जनवरी से होगी एक हजार नागा साध्वियों की भर्ती। महाकुंभ 2025 में छठें दिन तक लगातार श्रद्धालुओं – तीर्थयात्रियों के आने का क्रम बने रहने के साथ ही सनातन के गहरे आस्था और श्रद्धा के इस भव्य-दिव्य आयोजन में सबके लिए आकर्षण और कौतूहल का विषय बने नागा साधु समाज को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है।
पुरुष नागा साधुओं की भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब इसी क्रम में इसी माह के 27 जनवरी से नागा साध्वियों यानि महिला नागा साधुओं की भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू होने जा रही है। आरंभिक आकलन के मुताबिक, इस बार के कुंभ में करीब एक हजार सनातन धर्मावलंबी महिलाएं नागा बनने के लिए आगे आई हैं एवं उनकी दीक्षा संस्कार एवं साध्वी बनने से पहले प्रशिक्षण रूपी परीक्षण की कठिन दौर जल्द ही शुरू होगी।
इस बार मातृ-शक्ति ने अखाड़ों से जुड़ने में दिखाई गहरी रुचि
महाकुंभ 2025 को लेकर जो सबसे अहम बात मेला क्षेत्र में पधारे 13 सनातनी अखाड़ों की ओर से निचोड़ रूप में सामने आई है, वह है कि – इस बार महाकुंभ में मातृ शक्ति ने अखाड़ों से जुड़ने में गहरी रुचि दिखाई है। इसके परिणाम स्वरूप प्रयागराज महाकुंभ सबसे अधिक महिला संन्यासियों की दीक्षा का इतिहास लिखने जा रहा है।
कुल मिलाकर महाकुंभ महिलाओं को नागा संन्यासी की दीक्षा देने को लेकर भी नया इतिहास लिखने जा रहा है। संन्यासी श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े की महंत आराधना गिरी कहती हैं कि इसे लेकर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही है। आगामी 27 जनवरी को संन्यास दीक्षा का अनुष्ठान संभावित है।

महाकुंभ 2025 में पढ़ी-लिखी महिलाओं ने अखाड़ों से जुड़ने और साध्वी बनने में दिखाई ज्यादा रुचि
महाकुंंभ 2025 में इसी क्रम में मेला क्षेत्र में विराजितल 13 सनातनी अखाड़ों के महंत और संतों की ओर से एक बात सामान्य तौर पर सामने आई है कि इस बार अखाड़े से जुड़ने एवं साधु बनने में पुरुष वर्ग की तुलना में महिलाओं ने ज्यादा रुचि दिखाई है। उसमें दिलचस्प बात यह है कि ऐसा रुचि जाहिर करने वालीं और सामने आने वाली महिलाओं में अभी तक सभी पढ़ी-लिखीं एवं सभ्रांत की हैं।
इन्हें परिवार, समाज आदि से वैराग्य हो गया है और साध्वी बनकर ही समाज, देश और विश्व कल्याण की चाह रखने को संन्यासी जीवन अपनाना चाह रही हैं। इन्हीं में से एक हैं – गुजरात के राजकोट से पधारीं पीएचडी डिग्रीधारी साध्वी। गुजरात के राजकोट से आईं राधेनंद भारती इस महाकुंभ में संस्कार की दीक्षा लेंगी।
राधेनंद इस समय गुजरात की कालिदास रामटेक यूनिवर्सिटी से संस्कृत में पीएचडी कर रही हैं। वह बताती हैं कि मेरे पिता बिजनेस मैन हैं। घर में सब कुछ है, लेकिन मेरा मन वहां नहीं लगा। गौ सेवा और आध्यात्मिक अनुभूति के लिए मैंने घर छोड़कर संन्यास लेने का फैसला किया। पिछले 12 साल से अपने गुरु की सेवा में हूं।

महाकुंभ में साध्वी बनने वालों के बारे में अखाड़ों से मिली जानकारी जानें…
महाकुंभ 2025 में एक साधु-साध्वी बनने वालों की पृष्ठभूमि देखें तो कुछ अलग ही परिदृश्य सामने आ रहा है। कई उच्च शिक्षा प्राप्त महिलाओं में गृहस्थ जीवन छोड़कर संन्यास धारण करने का जबरदस्त क्रेज है। महिला संत दिव्या गिरी के मुताबिक, ‘इस बार जो महिलाएं दीक्षा संस्कार ले रही हैं, उसमें उच्च शिक्षा प्राप्त नारियों की संख्या अधिक है, जो आध्यात्मिक अनुभूति के लिए संस्कार दीक्षित हो संन्यासी बनेंगी’।

इसी तथ्य को पुष् करते हुए संन्यासी श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े की महंत आराधना गिरी ने बताया कि साध्वियों की भर्ती करने को लेकर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही है। इसी क्रम में अहम जानकारी संयासिनी श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े की महिला संत दिव्या गिरी ने साझा की है।
संत दिव्या गिरी ने कहा कि – ‘इस बार महाकुंभ में अकेले श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के अंतर्गत 200 से अधिक महिलाओं की संन्यास दीक्षा होगी। सभी अखाड़ों को अगर शामिल कर लिया जाए तो यह संख्या एक हजार का आंकड़ा पार कर जाएगी’।


















