डिजिटल डेस्क : मोहन भागवत बोले – मतभेदों का सम्मान हो…। रविवार को गणतंत्र दिवस के मौके पर महाराष्ट्र के भिवंडी में ध्वजारोहण करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि – ‘मतभेदों का सम्मान किया जाना चाहिए। सद्भाव में रहने की कुंजी ही एकजुटता है।
…आज विश्व प्रतीक्षा कर रहा है कि भारत से हमें आगे का रास्ता मिले। …ऐसा भारत बनाना हम सबका स्वाभाविक दायित्व है’।
आरएसएस प्रमुख ने दिया चावल का उदाहरण
इसी क्रम में संघ प्रमुख ने अपनी बात समझाते हुए भागवत ने चावल पकाने की तुलना किसी भी कार्य में ज्ञान की आवश्यकता से की। डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि- ‘यदि आप चावल पकाना जानते हैं, तो आपको पानी, गर्मी और चावल की आवश्यकता होगी।
…लेकिन यदि आप इसे पकाना नहीं जानते हैं और इसके बजाय सूखा चावल खाते हैं, पानी पीते हैं, और घंटों तक सूरज की रोशनी में खड़े रहते हैं, तो यह नहीं बनेगा। भोजन, ज्ञान और समर्पण आवश्यक है’।

आरएसएस प्रमुख बोले – विविधता के कारण भारत के बाहर हो रहे झगड़े
भिवंडी में ध्वजारोहण के बाद अपने संबोधन में आरएसएस प्रमुख ड. मोहन भागवत ने कहा कि – ‘जश्न के साथ-साथ गणतंत्र दिवस “राष्ट्र के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को याद रखने” का भी अवसर है। …विविधता के कारण भारत के बाहर झगड़े हो रहे हैं।
…हम विविधता को जीवन के स्वाभाविक हिस्से के रूप में देखते हैं। आपकी अपनी विशिष्टताएं हो सकती हैं, लेकिन आपको एक-दूसरे के लिए अच्छा होना चाहिए। यदि आप जीना चाहते हैं, तो यह एक सामंजस्यपूर्ण जीवन होना चाहिए’।

डॉ. मोहन भागवत बोले – ज्ञान के साथ किया जाए काम…
इसी क्रम में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने अपने संबोधन में ज्ञान और समर्पण भाव दोनों के साथ काम करने के महत्व पर जोर दिया। डॉ. भागवत ने आगे कहा कि -‘… उद्यमी होना महत्वपूर्ण है, लेकिन आपको अपना काम हमेशा ज्ञान के साथ करना चाहिए। बिना सोचे समझे किया गया कोई भी काम फल नहीं देता, बल्कि परेशानी लाता है।
…ज्ञान के बिना किया गया काम पागल का काम बन जाता है। अगर आप दुखी हैं तो आपका परिवार दुखी है तो वह खुश नहीं रह सकता। उसी तरह, अगर शहर परेशानी का सामना कर रहा है तो कोई परिवार खुश नहीं रह सकता है’।


















