Jharkhand High Court: रिनपास में कथित तौर पर स्वस्थ युवती को भर्ती कराने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट सख्त। कोर्ट ने एसएसपी को युवती और उसकी मां को पेश करने का आदेश दिया।
Jharkhand High Court रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने मानसिक रूप से स्वस्थ बताई जा रही एक युवती को रिनपास में कथित तौर पर अवैध तरीके से भर्ती करने के मामले में गंभीर रुख अपनाया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने हेवियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्वी सिंहभूम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि पीड़ित युवती और उसकी मां को अगली सुनवाई में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि मामले में जांच अधिकारी के बयान बदलने और उनके आचरण की जांच की जाए। खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 मार्च की तिथि निर्धारित की है।
मामले में रिनपास के निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक अदालत में उपस्थित हुए। उन्होंने बताया कि संबंधित युवती 26 जून 2025 से 16 अक्टूबर 2025 तक अस्पताल में भर्ती रही थी। बाद में उसकी मां के अनुरोध पर उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार डिस्चार्ज के बाद युवती फॉलोअप इलाज के लिए दोबारा अस्पताल नहीं आई।
Key Highlights
झारखंड हाईकोर्ट ने रिनपास भर्ती मामले में सख्त रुख अपनाया
कोर्ट ने पूर्वी सिंहभूम के एसएसपी को युवती और उसकी मां को पेश करने का निर्देश दिया
पुलिस अधिकारी के बयान बदलने और आचरण की जांच के आदेश
युवती 26 जून से 16 अक्टूबर 2025 तक रिनपास में भर्ती रही
मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित
संपत्ति विवाद से जुड़ा बताया जा रहा मामला
जांच अधिकारी ने अदालत को जानकारी दी कि जिस संपत्ति को लेकर विवाद की बात कही जा रही है, वह 28 नवंबर 2025 को बेच दी गई थी। इसके बाद महिला का परिवार जमशेदपुर छोड़कर पंजाब चला गया।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में रंजीत सिंह नामक व्यक्ति ने हेवियस कॉर्पस याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी मंगेतर को उसके परिवार ने संपत्ति विवाद के कारण मानसिक अस्पताल में भर्ती करा दिया, जबकि वह पूरी तरह मानसिक रूप से स्वस्थ थी।
मैट्रिमोनियल साइट से हुई थी मुलाकात
याचिका में बताया गया है कि रंजीत सिंह और महिला की मुलाकात वर्ष 2023 में एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से हुई थी। दोनों परिवारों की सहमति से रोका और शगुन की रस्में भी हो चुकी थीं और अक्टूबर 2024 में विवाह तय किया गया था।
प्रार्थी के अनुसार अगस्त 2024 में महिला का भाई ऑस्ट्रेलिया से भारत आया और उसने विवाह से पहले पैतृक संपत्ति में हिस्सा छोड़ने का दबाव बनाया। आरोप है कि मना करने पर महिला को धमकियां दी गईं।
परिवार ने मानसिक बीमारी का लगाया आरोप
याचिका में कहा गया है कि 27 अगस्त 2024 को दोनों को कदमा थाना बुलाया गया, जहां महिला की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनकी बेटी वर्ष 2011 से मानसिक रूप से अस्वस्थ है और उसका इलाज पहले डेविस इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री में तथा बाद में रिनपास कांके में कराया गया था।
अब हाईकोर्ट ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है और युवती को कोर्ट में पेश करने का आदेश दिया है।
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