JPSC Scam: अभय तिवारी के रिमांड में बड़ा खुलासा, 60 से 70 लाख तक वसूली का दावा

JPSC मामले में गिरफ्तार अभय तिवारी ने CID पूछताछ में कथित वसूली सिंडिकेट और 11वीं व 13वीं परीक्षा में पैसे लेने से जुड़े कई दावे किए हैं।


JPSC Scam रांची: JPSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितता की जांच कर रही CID को टीडीपीएल के गिरफ्तार मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी उर्फ मनोज तिवारी से रिमांड के दौरान पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। पूछताछ में अभय तिवारी ने कथित तौर पर एक बड़े वसूली सिंडिकेट के बारे में जानकारी दी है। उसके बयान में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के अलावा पूर्व सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद के नाम भी सामने आने की बात कही गई है। इसके साथ ही एक कोचिंग संस्थान से जुड़े रवि कुमार और TDPL के निदेशक रामवीर सिंह की कथित भूमिका का भी उल्लेख किया गया है।

JPSC Scam: 11वीं और 13वीं JPSC में 15 लाख रुपये तक वसूली का दावा

अभय तिवारी के कथित बयान के अनुसार, 11वीं और 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा के साक्षात्कार में अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये तक की रकम ली गई थी। उसने बताया कि उसने आदित्य पांडेय नामक कोचिंग संचालक से संपर्क कर अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराया था।

बयान के मुताबिक, आदित्य पांडेय ने JPSC की पूर्व सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम की मदद से कथित तौर पर सात अभ्यर्थियों के साक्षात्कार में नंबर बढ़वाने की व्यवस्था की। इनमें तीन DSP, एक उप कारापाल और अन्य पदों के अभ्यर्थी शामिल होने का दावा किया गया है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। CID की जांच अभी जारी है और उपलब्ध जानकारी के अनुसार सदस्यों के खिलाफ आरोपों को पुष्ट करने वाले ठोस साक्ष्य मिलने की बात सामने नहीं आई है।

JPSC Scam: PT से फाइनल चयन तक अलग-अलग रेट तय होने का दावा

अभय तिवारी ने CID को दिए कथित बयान में बताया है कि 11वीं और 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में प्रारंभिक परीक्षा से लेकर अंतिम चयन तक अलग-अलग रकम तय थी। उसके अनुसार, प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से पांच लाख रुपये और SC-ST वर्ग के अभ्यर्थियों से दो से तीन लाख रुपये लेने की बात थी।

वहीं, अंतिम रूप से चयन कराने के लिए प्रति अभ्यर्थी 60 से 70 लाख रुपये तक की रकम तय होने का दावा किया गया है। कथित बयान के अनुसार, साक्षात्कार से जुड़ी रकम डॉ. अजिता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम के माध्यम से वसूले जाने की बात कही गई है।

अभय ने यह भी आरोप लगाया कि JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के लिए मुख्य सचिव के आवासीय कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र के माध्यम से रकम वसूली जाती थी। वहीं, डॉ. जमाल अहमद के लिए हजारीबाग के कथित बिचौलियों द्वारा अभ्यर्थियों से पैसे लेने की बात कही गई है। इन गतिविधियों की जानकारी TDPL के निदेशक रामवीर सिंह को होने का भी दावा किया गया है।


Key Highlights

  • टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी से रिमांड में लंबी पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा।

  • 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षा में प्रारंभिक से अंतिम चयन तक अलग-अलग रकम तय होने की बात कही गई।

  • प्रारंभिक परीक्षा के लिए सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से पांच लाख और SC-ST अभ्यर्थियों से दो से तीन लाख रुपये लेने का दावा।

  • अंतिम चयन के लिए प्रति अभ्यर्थी 60 से 70 लाख रुपये तक की रकम तय होने की बात सामने आई।

  • JSSC CGL मामले में CID ने अभ्यर्थियों से दस्तावेज, स्क्रीनशॉट, ऑडियो और वीडियो जैसे साक्ष्य मांगे हैं।


JPSC Scam: डॉ. जमाल ने आरोपों से किया इनकार, JSSC CGL पर भी CID की नजर

JPSC के पूर्व सदस्य डॉ. जमाल अहमद ने अभय तिवारी के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उनका अभय तिवारी या किसी बिचौलिए से कोई परिचय नहीं है और न ही TDPL एजेंसी से उनका कोई संबंध रहा है। उन्होंने कहा कि आरोपों की जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली।

डॉ. जमाल के अनुसार, एजेंसी की कार्यप्रणाली में जो अनियमितताएं उन्हें दिखाई दी थीं, उन्हें उन्होंने सक्षम स्तर पर उठाया था। उन्होंने JPSC अध्यक्ष को पत्र लिखकर एजेंसी की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताने के साथ OMR शीट की फॉरेंसिक जांच कराने का अनुरोध भी किया था। उन्होंने एजेंसी की कार्यप्रणाली को पारदर्शी और संतोषजनक नहीं मानते हुए खुद को उसके कार्यों से अलग रखने का अनुरोध किए जाने की बात कही।

इधर, CDPO परीक्षा को लेकर भी अभय तिवारी ने CID को कथित तौर पर जानकारी दी है। उसके अनुसार, परीक्षा पास कराने के लिए प्रति अभ्यर्थी 10 लाख रुपये की दर तय थी। एक अभ्यर्थी से 15 लाख रुपये और काजल भारती नामक अभ्यर्थी से 10 लाख रुपये लिए जाने का दावा भी बयान में किया गया है।

JPSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच के बीच CID ने अब JSSC CGL परीक्षा से जुड़े मामलों में भी अभ्यर्थियों और आम लोगों से साक्ष्य मांगे हैं। CID ने अपील की है कि परीक्षा में अनियमितता से संबंधित दस्तावेज, स्क्रीनशॉट, ऑडियो, वीडियो या अन्य ठोस साक्ष्य उपलब्ध कराए जाएं। एजेंसी के अनुसार, शिकायतकर्ता अपनी पहचान गोपनीय रखते हुए निर्धारित WhatsApp नंबर 9934309058 और आधिकारिक ईमेल complainjpse-cid@jhpolice.gov.in पर साक्ष्य भेज सकते हैं।

 

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