JPSC भर्ती घोटाला: पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांगते को जमानत से इनकार, कोर्ट ने कहा जांच प्रभावित होने का खतरा

JPSC भर्ती घोटाले में पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांगते को जमानत नहीं मिली। रांची कोर्ट ने जांच प्रभावित होने की आशंका जताते हुए याचिका खारिज कर दी।


JPSC Scam रांची: रांची में JPSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के मामले में जेल में बंद झारखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांगते को कोर्ट से राहत नहीं मिली। अपर न्यायायुक्त प्रथम योगेश कुमार की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि आरोपी प्रभावशाली व्यक्ति हैं और उनके जेल से बाहर आने पर जांच प्रभावित होने की आशंका है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है।

JPSC Scam: कोर्ट ने जमानत देने से क्यों किया इनकार

दो दिन पहले जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है। आरोपी के प्रभावशाली होने के कारण उनके बाहर आने पर जांच प्रभावित होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी माना कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में एल ख्यांगते को जमानत पर रिहा करना उचित नहीं होगा।


Key Highlights

  • JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांगते को कोर्ट से जमानत नहीं मिली
  • अपर न्यायायुक्त प्रथम की अदालत ने जमानत याचिका खारिज की
  • कोर्ट ने जांच प्रभावित होने की आशंका जताई
  • CID ने अभय तिवारी के स्वीकारोक्ति बयान का हवाला दिया
  • TDPL को ठेका दिलाने के बदले दो करोड़ रुपये की कथित डील का आरोप

JPSC Scam:CID ने अभय तिवारी के बयान का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान एल ख्यांगते के अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है। बचाव पक्ष ने कहा कि छापेमारी के दौरान भी उनके खिलाफ ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिसके आधार पर उन्हें जेल में रखा जाए।

वहीं सीआईडी की ओर से अदालत को बताया गया कि JPSC नियुक्ति घोटाले के कथित किंगपिन अभय तिवारी ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में एल ख्यांगते की भूमिका का उल्लेख किया है। सीआईडी के अनुसार अभय तिवारी ने कहा है कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी TDPL के चयन में एल ख्यांगते की महत्वपूर्ण भूमिका थी।

JPSC Scam: TDPL को ठेका दिलाने में दो करोड़ की डील का आरोप

सीआईडी ने कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान TDPL को परीक्षा आयोजन का ठेका दिलाने के बदले कथित तौर पर दो करोड़ रुपये की डील किए जाने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि एजेंसी को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी देने के साथ भुगतान के एवज में 20 प्रतिशत कमीशन देने की शर्त भी रखी गई थी।

सीआईडी के मुताबिक TDPL की ओर से आयोजित परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं बरती गई और एल ख्यांगते को इसकी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि अन्य आरोपियों ने एल ख्यांगते पर TDPL से दो करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप लगाया है।

भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायत के बाद सीआईडी ने JPSC कार्यालय में छापेमारी की थी। इसके बाद एल ख्यांगते ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उनसे कई दौर की पूछताछ के बाद सीआईडी ने 10 अगस्त को उन्हें गिरफ्तार किया था।

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