Bihar Public Distribution System: बिहार में 8.45 करोड़ राशन लाभुक, 4,910 दुकानों के लिए विज्ञापन; शिकायतों पर बनेगा फ्लाइंग स्क्वॉड

Bihar Public Distribution System: बिहार में जन वितरण प्रणाली (PDS) को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था मजबूत करने की पहल की है। सोमवार को विभागीय मंत्री अशोक चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक में राशन कार्ड, खाद्यान्न वितरण, स्मार्ट पीडीएस, दुकानों की अनुज्ञप्ति और धान अधिप्राप्ति की समीक्षा की गई। बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को पात्र लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने, लंबित मामलों का समयबद्ध निष्पादन करने और शिकायतों के त्वरित समाधान के निर्देश दिए। शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड की व्यवस्था विकसित करने की पहल भी की जा रही है।

बिहार में 8.45 करोड़ लाभुकों को मिल रहा खाद्य सुरक्षा योजनाओं का लाभ

बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत बिहार में लगभग 2.09 करोड़ राशन कार्डों के माध्यम से 8.45 करोड़ लाभुक आच्छादित हैं। इनमें से 6.54 करोड़ लाभुकों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है, जो लगभग 80.07 प्रतिशत है। राज्य में 1.85 करोड़ राशन कार्डों पर खाद्यान्न वितरण किया जा रहा है। वन नेशन, वन राशन कार्ड (ONORC) व्यवस्था के तहत अक्टूबर 2026 में बिहार के 3.65 लाख राशन कार्डधारियों ने दूसरे राज्यों में खाद्यान्न प्राप्त किया। वहीं, शिकायत निवारण के लिए प्राप्त 4,069 शिकायतों में से 3,383 का निष्पादन किया जा चुका है। यह कुल शिकायतों का 83.14 प्रतिशत है। मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि तकनीक के उपयोग से जन वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। उन्होंने शिकायतों के समाधान और खाद्यान्न वितरण की नियमित निगरानी पर जोर दिया।

4,910 राशन दुकानों की रिक्तियों के विरुद्ध विज्ञापन, 1,237 लाइसेंस जारी

जन वितरण प्रणाली की दुकानों के लिए नई अनुज्ञप्ति जारी करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई। बैठक में बताया गया कि राज्य में 4,910 रिक्तियों के विरुद्ध सभी पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। इन पदों के लिए 50,031 आवेदन प्राप्त हुए हैं। अब तक 1,237 नई अनुज्ञप्तियां जारी की जा चुकी हैं। मंत्री ने शेष मामलों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर निष्पादन करने और पात्र आवेदकों को नियमानुसार लाइसेंस देने का निर्देश दिया। बैठक में राशन वितरण से संबंधित शिकायतों की निगरानी और उनके समाधान के लिए फ्लाइंग स्क्वॉड की व्यवस्था विकसित करने पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाना है।

नए राशन कार्ड के लिए मिले 13.93 लाख आवेदन

राशन कार्ड निर्माण और संशोधन की समीक्षा के दौरान बताया गया कि नए राशन कार्ड के लिए 13,93,704 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 7,40,925 राशन कार्ड जारी किए गए हैं। इसके अलावा, राशन कार्डों में 14,61,286 नए सदस्यों को जोड़ा गया है। पात्र परिवारों को राशन कार्ड उपलब्ध कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। पंचायत विकास शिविरों के माध्यम से आवेदन लेने के साथ उनकी ऑनलाइन प्रविष्टि, ई-केवाईसी, सत्यापन और स्वीकृति की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। विभाग के अनुसार, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और आपूर्ति निरीक्षक आवेदनों का सत्यापन करते हैं। इसके बाद अनुमंडल पदाधिकारी की स्वीकृति के आधार पर स्मार्ट पीडीएस के RCMS पोर्टल से नए राशन कार्ड जारी किए जाते हैं। संदिग्ध राशन कार्डों की भी जांच की जा रही है। इसमें एक से अधिक स्थानों पर दर्ज लाभुकों, आधार संबंधी विवरण, लंबे समय से खाद्यान्न नहीं लेने वाले कार्डधारियों और निर्धारित पात्रता मानकों से जुड़े अभिलेखों का सत्यापन शामिल है।

Bihar Public Distribution System 1

स्मार्ट पीडीएस से राशन वितरण और निगरानी होगी डिजिटल

बैठक में स्मार्ट पीडीएस (SMART-PDS) के तहत लागू डिजिटल प्रणालियों की प्रगति की समीक्षा की गई। विभागीय जानकारी के मुताबिक, बिहार में राशन कार्ड प्रबंधन प्रणाली (RCMS), इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल (ePoS), सप्लाई चेन मैनेजमेंट (SCM) और फेयर प्राइस शॉप मैनेजमेंट सिस्टम (FPSMS) मॉड्यूल लागू किए गए हैं। 11 जुलाई 2026 से RCMS के जरिए राशन कार्ड बनाने, संशोधित करने और सदस्यों को जोड़ने या हटाने का काम किया जा रहा है। वहीं, 26 सितंबर 2026 से ePoS, SCM और FPSMS मॉड्यूल के माध्यम से खाद्यान्न वितरण, आवंटन, परिवहन तथा जन वितरण प्रणाली की दुकानों का प्रबंधन किया जा रहा है। ePoS के माध्यम से बायोमेट्रिक और आइरिस प्रमाणीकरण के आधार पर खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था है। नए राशन कार्ड जारी करने से पहले लाभुकों का ई-केवाईसी अनिवार्य बताया गया है। राशन कार्ड के आंकड़ों को आयुष्मान भारत (PM-JAY) सहित अन्य संबंधित प्रणालियों से जोड़ने की दिशा में भी कार्रवाई की जा रही है।

खरीफ सीजन में 35 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य

बैठक में खरीफ विपणन मौसम 2026-27 के लिए धान अधिप्राप्ति की तैयारियों की समीक्षा की गई। राज्य में इस सीजन के दौरान 35 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य के अनुसार, साधारण धान के लिए 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान के लिए 2,461 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय की गई है। कोसी, पूर्णिया, तिरहुत, दरभंगा और सारण प्रमंडलों के जिलों में धान खरीद 1 नवंबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक निर्धारित है। राज्य के शेष जिलों में खरीद 15 नवंबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक होगी। कस्टम मिल्ड राइस (CMR) प्राप्त करने की अवधि 1 नवंबर 2026 से 31 अगस्त 2027 तक तय की गई है। पिछले खरीफ विपणन मौसम 2025-26 में 36.85 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 36.79 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी। यह लक्ष्य का 99.84 प्रतिशत था। इस दौरान 5,40,469 किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में 8,807.44 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। रबी विपणन मौसम 2026-27 में 1.30 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने के लक्ष्य के मुकाबले 25,159.446 मीट्रिक टन की खरीद हुई है। इससे 6,095 किसानों को लाभ मिला और उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में 67.89 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

राज्य स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक में कई जनप्रतिनिधि शामिल

बैठक में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश, पिछड़ा वर्ग एवं अतिपिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेन्द्र कुमार रौशन, सांसद सुनील कुमार, विधान पार्षदों, विधायक मुरारी प्रसाद गौतम और संबंधित विभागों के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में जन वितरण प्रणाली दुकानदार संघ और फेयर प्राइस डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। चर्चा का प्रमुख उद्देश्य योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन का आकलन करना, शिकायतों के निवारण में सुधार लाना और पात्र लाभुकों तक खाद्यान्न पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करना था।

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