‘कदाचार संबंधी कार्रवाई में नियमों का अनुपालन जरूरी, CCA रूल की सभी कंडिकाओं को पढ़ें अधिकारी’

पटना : सामान्य प्रशासन विभाग के मुख्य जांच आयुक्त निदेशालय की ओर से आयोजित उन्मुखीकरण कार्यक्रम में महानिदेशक-सह-मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने कहा कि अधिकारियों के लिए बिहार सरकारी सेवक वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील (CCA) नियमावली 2005 का अध्ययन जरूरी है। वह मंगलवार को दशरथ माझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान के सभागार में कृषि सेवा के अधिकारियों के लिए आयोजित प्रशिक्षण सत्र को संबोधित कर रहे थे।

दीपक कुमार सिंह ने कहा- निदेशालय करीब छह महीने से प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कर रहा है

दीपक कुमार सिंह ने कहा कि निदेशालय करीब छह महीने से प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कर रहा है। पहले निगरानी, संचालन, प्रस्तुतीकरण, अखिल भारतीय सेवा के पदाधिकारियों के साथ-साथ अब अन्य संवर्ग के पदाधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी सेवा में तैनात सभी पदाधिकारियों को सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी सीसीए रूल संबंधी पुस्तक और उसमें दिए गए सर्कुलर का अध्ययन करना जरूरी है। कोई भी कार्रवाई पदाधिकारी के खुद की समझ या पारंपरिक आधार पर नहीं किया जाएगा।

‘कोर्ट में अधिकांश मामले कार्रवाई की प्रक्रिया में त्रुटि और नैसर्गिक न्याय के अभाव में खारिज होते हैं’

उन्होंने कहा कि कोर्ट में अधिकांश मामले कार्रवाई की प्रक्रिया में त्रुटि और नैसर्गिक न्याय के अभाव में खारिज होते हैं। राज्य सरकार के पदाधिकारियों के लिए सीसीए रूल में दी गई 33 कंडिकाओं का अध्ययन जरूरी है। नियमों के अनुपालन से सरकारी सेवक के खिलाफ आने वाले शिकायत या परिवाद में दंड देने की मात्रा का सही निर्धारण होता है और नैसर्गिक न्याय के अनुपालन का रास्ता साफ होगा।

आपराधिक मामलों में कोर्ट जिस दिन चार्ज फ्रेम करेगा, प्रकरण उसी दिन से प्रारंभ माना जाएगा

इस अवसर पर प्रशिक्षक सतीश तिवारी ने सरकारी सेवकों के खिलाफ आने वाले शिकायत और परिवाद के बीच का अंतर बताते हुए सीसीए रूल के तहत प्रकरण की प्राथमिक जांच, आरोप पत्र का गठन, बचाव का लिखित अभिकथन, समीक्षा, संचालन, प्रस्तुतीकरण पदाधिकारी की नियुक्ति और अनुशासनिक प्राधिकार के समक्ष रखे गए निष्कर्षों के अलग-अलग प्रावधानों से सभी पदाधिकारियों को रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि विभागीय कार्यवाही या कार्रवाई के बजाए अनुशासनिक कार्यवाही या कार्रवाई नियम संगत है। प्रपत्र क की जगह आरोप पत्र, स्पष्टीकरण आदि की बजाय बचाव का लिखित अभिकथन शब्द का प्रयोग सही माना जाएगा। उन्होंने किसी भी सरकारी सेवक की प्रोन्नति रोकने के पीछे के तीन अलग-अलग परिस्थियों से अवगत रूबरू कराते हुए कहा कि आपराधिक मामलों में कोर्ट जिस दिन चार्ज फ्रेम करेगा, प्रकरण उसी दिन से प्रारंभ माना जाएगा।

तिवारी ने सरकारी सेवकों के खिलाफ बेनाम, छद्मनाम या खुले पत्र के माध्यम से प्राप्त होने वाले परिवाद, शिकायतों पर कार्रवाई संबंधी बारीक पहलुओं की भी जानकारी दी

तिवारी ने सरकारी सेवकों के खिलाफ बेनाम, छद्मनाम या खुले पत्र के माध्यम से प्राप्त होने वाले परिवाद, शिकायतों पर कार्रवाई संबंधी बारीक पहलुओं की भी जानकारी दी। इस अवसर पर बतौर प्रशिक्षक शालिग्राम पांडेय, भगवान साहू आदि ने सीसीए रूल के अलग-अलग पहलुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में संयुक्त सचिव प्रभात कुमार के साथ-साथ दूसरे कई पदाधिकारियों की मुख्य उपस्थिति रही।

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