Bihar Vigilance Department: बिहार में भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए निगरानी विभाग ने अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। इसी क्रम में 21 सितंबर 2026 को निगरानी विभाग, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, विशेष निगरानी इकाई और तकनीकी परीक्षक कोषांग की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक सोमवार को अपराह्न 3:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। इसका उद्देश्य जिला स्तरीय निगरानी कोषांगों और उड़नदस्ता दलों को अधिक सशक्त और प्रभावी बनाना तथा उनके दायित्वों से संबंधित आवश्यक निर्देश देना था। निगरानी विभाग के अनुसार, राज्य में भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए किए जा रहे प्रयासों से विभाग को अपेक्षित सफलता मिल रही है। समीक्षा बैठक में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
हर जिले में बनेगी Dedicated Helpline
बैठक में प्रत्येक जिले में एक Dedicated Helpline बनाने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही हेल्पलाइन का व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया, ताकि आम लोग भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतें उचित माध्यम तक पहुंचा सकें। जिला स्तर पर हेल्पलाइन की स्थापना से शिकायतों को दर्ज करने और संबंधित मामलों को निगरानी तंत्र तक पहुंचाने की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जाएगा।
निगरानी मामलों की FIR समय पर उपलब्ध कराने का निर्देश
समीक्षा बैठक में जिला स्तर पर निगरानी से संबंधित मामलों में दर्ज होने वाली प्राथमिकी यानी FIR को समय पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। इस निर्देश का उद्देश्य भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में सूचना के आदान-प्रदान को तेज करना और जांच प्रक्रिया में अनावश्यक देरी को कम करना है। संबंधित अधिकारियों को मामलों की जानकारी समय पर साझा करने को कहा गया है।
उड़नदस्ता दलों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
बैठक में प्रत्येक जिले में उड़नदस्ता दल के पदाधिकारियों और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण आयोजित कराने का भी निर्देश दिया गया। निगरानी विभाग का मानना है कि प्रभावी कार्रवाई के लिए जिला स्तर पर तैनात टीमों को उनके दायित्वों, प्रक्रियाओं और कार्यप्रणाली की स्पष्ट जानकारी होना जरूरी है। प्रशिक्षण के माध्यम से उड़नदस्ता दलों की कार्यक्षमता बढ़ाने और भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों पर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
पांच विभागों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
समीक्षा बैठक में बताया गया कि निगरानी से संबंधित सबसे अधिक मामले पांच विभागों से प्राप्त होते हैं। इनमें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, गृह विभाग तथा नगर एवं आवास विकास विभाग शामिल हैं। बैठक में इन विभागों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। निगरानी तंत्र को इन क्षेत्रों में भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों और मामलों की प्रभावी निगरानी करने के निर्देश दिए गए।
भ्रष्टाचार नियंत्रण के लिए समन्वित कार्रवाई पर जोर
संयुक्त समीक्षा बैठक में जिला स्तरीय कोषांगों, उड़नदस्ता दलों और संबंधित निगरानी इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। निगरानी विभाग ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए शिकायतों की प्राप्ति, प्राथमिकी की सूचना, जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना आवश्यक है। बैठक में दिए गए निर्देशों के जरिए राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और जीरो टॉलरेंस नीति को धरातल पर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया गया।
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