सीबीआई ने डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी मामले में 16 राज्यों के 80 ठिकानों पर छापेमारी की। दो आरोपी गिरफ्तार, सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट और दो करोड़ से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिले।
Cyber Crime नई दिल्ली: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में फैल रहे साइबर अपराध के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ा अभियान चलाते हुए 16 राज्यों में एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान 80 ठिकानों पर तलाशी ली गई, जिसमें दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट का भी खुलासा हुआ, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर लोगों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराने और फर्जी आदेश जारी करने के लिए किया जाता था।
Cyber Crime: 16 राज्यों में चला सीबीआई का विशेष अभियान
सीबीआई ने ओडिशा, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, मणिपुर, असम, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, दिल्ली समेत कुल 16 राज्यों में डिजिटल अरेस्ट से जुड़े साइबर अपराधियों के खिलाफ एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए गए।
Key Highlights
सीबीआई ने 16 राज्यों में 80 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।
चेन्नई और कोलकाता से दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट बनाकर डिजिटल अरेस्ट में इस्तेमाल करने का खुलासा।
शेल कंपनियों के बैंक खातों से दो करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिले।
विदेशी नागरिकों से साइबर ठगी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद हुए।
Cyber Crime: चेन्नई और कोलकाता से दो आरोपी गिरफ्तार
छापेमारी के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर चेन्नई और कोलकाता से एक एक साइबर अपराधी को गिरफ्तार किया गया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने शेल कंपनियां बनाकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से अर्जित रकम को ठिकाने लगाने में किया। सीबीआई को इन खातों से दो करोड़ रुपये से अधिक की मनी लॉन्ड्रिंग के प्रमाण मिले हैं।
Cyber Crime: सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट से तैयार होते थे फर्जी आदेश
जांच के दौरान सीबीआई को साइबर अपराधियों द्वारा तैयार की गई एक फर्जी वेबसाइट मिली, जिसे बिल्कुल सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट जैसा बनाया गया था। आशंका है कि इस वेबसाइट का इस्तेमाल डिजिटल अरेस्ट के दौरान फर्जी न्यायिक आदेश तैयार कर पीड़ितों को डराने और उनसे पैसे ऐंठने के लिए किया जाता था। इसके अलावा छापेमारी में ऐसे दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, जिनसे विदेशी नागरिकों के साथ की गई साइबर ठगी के नेटवर्क का भी खुलासा हो सकता है।
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