बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में Bihar E-Cabinet System लागू किया जा रहा है, जिससे सरकारी कामकाज डिजिटल और पेपरलेस होगा।
Google पर 22Scope चुनेंBihar E-Cabinet System, पटना: बिहार में सरकारी कामकाज को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अहम पहल की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को ई-कैबिनेट व्यवस्था लागू करने और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में कैबिनेट की पूरी कार्यप्रणाली को डिजिटल और पेपरलेस बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। इस व्यवस्था के लागू होने से सरकारी फैसलों की प्रक्रिया तेज होने के साथ-साथ प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है। लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में आयोजित बैठक में मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से ई-कैबिनेट व्यवस्था की कार्यप्रणाली और इसके विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग करते हुए इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया।
कैबिनेट के फैसलों में आएगी तेजी
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि ई-कैबिनेट व्यवस्था सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। इसके माध्यम से मंत्रिमंडल से जुड़े प्रस्तावों और निर्णयों की प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सरल, त्वरित और पारदर्शी बनाया जा सकेगा। सरकारी फाइलों के निपटारे में लगने वाला समय कम होगा, जिससे प्रशासनिक निर्णयों को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य है। डिजिटल माध्यम से कैबिनेट से संबंधित कार्यों का संचालन होने पर विभागों के बीच सूचनाओं और प्रस्तावों के आदान-प्रदान में सुविधा होगी। इससे सरकारी कामकाज अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाया जा सकेगा।
पूरी तरह डिजिटल होंगी कैबिनेट से जुड़ी फाइलें
नई व्यवस्था के तहत कैबिनेट से संबंधित फाइलों का संचालन पूरी तरह डिजिटल माध्यम से करने की योजना है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि फाइलों की आवाजाही और उनके निष्पादन की प्रक्रिया को डिजिटल बनाया जाए। इससे कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम होगी और प्रस्तावों को आगे बढ़ाने में होने वाली देरी को घटाने में मदद मिलेगी। ई-कैबिनेट व्यवस्था के जरिए कैबिनेट की बैठकों से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि तकनीक के इस्तेमाल से निर्णय प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और समयबद्ध हो।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी होगा इस्तेमाल
मुख्यमंत्री ने ई-कैबिनेट व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समेत आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और सुगम बनाने के लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। एआई के इस्तेमाल से सरकारी कार्यप्रणाली को अधिक दक्ष बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से सरकारी निर्णयों से जुड़ी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाया जाए। सरकार का लक्ष्य केवल फाइलों को ऑनलाइन करना नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाना है।
पेपरलेस प्रशासन से बचेगा समय और संसाधन
ई-कैबिनेट व्यवस्था को कागज रहित प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे कागज के इस्तेमाल में कमी आएगी और सरकारी संसाधनों की बचत होगी। साथ ही दस्तावेजों के प्रबंधन और फाइलों के संचालन में लगने वाला समय भी कम हो सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह, संजय कुमार सिंह, मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के विशेष सचिव अरविंद कुमार वर्मा समेत अन्य वरीय अधिकारी मौजूद रहे। राज्य सरकार ने आधुनिक तकनीक के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, दक्ष और जनोन्मुखी बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
Bihar E-Cabinet System क्या है?
यह एक डिजिटल व्यवस्था है जिसके तहत कैबिनेट की पूरी कार्यप्रणाली, फाइलों का संचालन और निर्णय प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी। इससे प्रशासन पेपरलेस और अधिक पारदर्शी बनेगा।
इस व्यवस्था से सरकारी कामकाज को क्या लाभ मिलेंगे?
इससे सरकारी फैसलों की प्रक्रिया तेज होगी, विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा, और प्रशासनिक कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही कागजी दस्तावेजों पर निर्भरता कम होगी।
क्या इस व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग होगा?
हां, मुख्यमंत्री ने ई-कैबिनेट व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत आधुनिक तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर विशेष जोर दिया है।
पेपरलेस प्रशासन से क्या लाभ होंगे?
इससे कागज के इस्तेमाल में कमी आएगी, सरकारी संसाधनों की बचत होगी, और दस्तावेजों के प्रबंधन में लगने वाला समय कम होगा। पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
Highlights





















