Bihar Road Projects 2026, पटना: बिहार में सड़क और एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में राज्य की चार प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं के लिए कुल 49,751 करोड़ रुपये की शीघ्र मंजूरी देने का अनुरोध किया गया। ये परियोजनाएं फिलहाल आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की अंतिम स्वीकृति के लिए विचाराधीन हैं। मुख्यमंत्री ने बिहार में सड़क और आधारभूत संरचना के विकास में लगातार सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित परियोजनाओं से राज्य में आवागमन बेहतर करने, माल ढुलाई की लागत घटाने और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
49,751 करोड़ की चार परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने का आग्रह
बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि करीब 330 किलोमीटर लंबाई वाली चार प्रमुख सड़क परियोजनाओं को सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (PPPAC) से स्वीकृति मिल चुकी है। अब इनके लिए CCEA की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से इन प्रस्तावों पर जल्द निर्णय कराने का अनुरोध किया। इनमें गंडक नदी पर दो लेन का पुल और पहुंच पथ, पटना में छह लेन एलिवेटेड एवं सर्विस रोड, पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और वाराणसी-रांची-कोलकाता ग्रीनफील्ड हाईवे शामिल हैं।
गंडक नदी पर पुल से लेकर पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे तक होंगे बड़े निर्माण
प्रस्तावित परियोजनाओं में 1,976.77 करोड़ रुपये की लागत से एनएच-727एए पर गंडक नदी में दो लेन का पुल और पहुंच पथ बनाया जाना है। इसके माध्यम से बिहार के मनुआपुल (बेतिया) को उत्तर प्रदेश के तिवारीपट्टी (सेवराही) से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा 8,455.86 करोड़ रुपये की लागत से सरिस्ताबाद-दीदारगंज और अनीसाबाद-दीदारगंज खंड में छह लेन एलिवेटेड रोड तथा सर्विस रोड का निर्माण प्रस्तावित है। यह काम हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत किया जाना है। सबसे बड़ी परियोजना 31,987.11 करोड़ रुपये की पटना-पूर्णिया चार लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे है। इसके साथ 7,331.40 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी-रांची-कोलकाता छह लेन ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण भी प्रस्तावित है। यह परियोजना कोणकी गांव से लेरुआ गांव तक HAM मोड पर विकसित की जानी है।
गोरखपुर-सिलीगुड़ी और रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे पर भी चर्चा
मुख्यमंत्री ने बैठक में गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के बिहार खंड को राष्ट्रीय एक्सप्रेस-वे के रूप में जल्द अधिसूचित करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इस परियोजना के निर्माण से पहले की प्रक्रियाओं में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सहयोग दे रही है। संबंधित जिलों में भूमि अधिग्रहण के लिए धारा 3A के तहत अधिसूचना की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। सम्राट चौधरी ने रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि संशोधित रूट को मंजूरी मिलने के बाद भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने इस मार्ग को नेपाल के साथ व्यापारिक संपर्क मजबूत करने और बिहार को हल्दिया बंदरगाह से जोड़ने के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने परियोजना को जल्द अधिसूचित कर स्वीकृति देने का अनुरोध किया।
मुजफ्फरपुर-बरौनी फोरलेन का काम तेज करने की मांग
बैठक में मुजफ्फरपुर-बरौनी एनएच-122 के चार लेन चौड़ीकरण का विषय भी उठाया गया। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से इस परियोजना की प्रक्रिया तेज करने का अनुरोध किया। उन्होंने बताया कि NHAI की ओर से इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा चुकी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव और विकास से जुड़ी जिम्मेदारियों की जानकारी भी दी। उनके अनुसार, बिहार में करीब 2,329 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का रखरखाव और विकास राज्य के पथ निर्माण विभाग को सौंपा गया है।
13,015 करोड़ की छह एनएच परियोजनाओं की DPR केंद्र को भेजी
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार के पथ निर्माण विभाग ने 323 किलोमीटर लंबाई की छह राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की DPR तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी है। इनकी अनुमानित लागत 13,015 करोड़ रुपये है। इनमें विक्रमशिला पुल का पहुंच पथ और मशरख-चकिया-भिट्ठामोड़ मार्ग का चार लेन चौड़ीकरण जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। उन्होंने इन परियोजनाओं के लिए जल्द तकनीकी और वित्तीय मंजूरी देने का आग्रह किया, ताकि आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सके और निर्माण कार्य में तेजी लाई जा सके।
बाढ़ सुरक्षा और पुल निर्माण पर भी हुई बातचीत
बैठक में बिहार के सड़क नेटवर्क के विस्तार के साथ पुल निर्माण, बेहतर कनेक्टिविटी और बाढ़ से सुरक्षा से जुड़े आधारभूत ढांचे पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने ड्रेजिंग के दौरान निकलने वाले बड़े पत्थरों का इस्तेमाल गैबियन युक्त स्पर बनाने में करने के प्रस्ताव पर सहमति की जानकारी दी। इस तरह के निर्माण का उपयोग नदी के किनारों और तटवर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क और पुलों से जुड़ी योजनाओं के पूरा होने पर राज्य में आवागमन आसान होगा। साथ ही व्यापार, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। अब इन प्रस्तावों पर केंद्र सरकार की मंजूरी और आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी।
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