पटना : बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने आज सूबे के प्रशासनिक कामकाज और आम जनता से जुड़े जमीन के मुद्दों पर खुलकर बात की । उन्होंने बताया कि जमीन से जुड़े मामलों को तेजी से सुलझाने और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सरकार एक बहुत बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत 6 अगस्त को एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक बुलाई गई है।
537 अंचल अधिकारी और 38 अपर समाहर्ता होंगे शामिल
मंत्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि 6 अगस्त को होने वाली इस महाबैठक में बिहार के सभी 537 अंचल अधिकारी, 101 अनुमंडल पदाधिकारी और सभी 38 जिलों के अपर समाहर्ता एक साथ बैठेंगे। इस बैठक का मुख्य मकसद यह तय करना है कि आम जनता के जमीन-जायदाद से जुड़े काम समय पर पूरे हों।
उन्होंने साफ किया कि जब जमीन के किसी मामले में कोर्ट (टाइटल सूट या सिविल सूट) का आदेश आता है, तो अंचल अधिकारी अपनी रिपोर्ट के साथ फाइल को अपर समाहर्ता के पास भेजते हैं, जहाँ से अंतिम फैसला होता है। सरकार ने सभी जिलों से पेंडिंग पड़े मामलों का पूरा डेटा पहले ही मंगा लिया है, ताकि बैठक में एक-एक जिले की असल स्थिति की जांच की जा सके।
हड़ताल के कारण रुका काम अब होगा तेज
मंत्री जी ने माना कि पिछले दिनों अंचल अधिकारियों और राजस्व कर्मचारियों की करीब तीन महीने तक चली हड़ताल की वजह से विभाग का बहुत सारा काम रुक गया था। इसके कारण लोगों की जमाबंदी, दाखिल-खारिज और दूसरे राजस्व मामलों में काफी देरी हुई और पेंडिंग फाइलों का अंबार लग गया। लेकिन अब हालात धीरे-धीरे पटरी पर लौट रहे हैं। रुकी हुई फाइलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जा रहा है।
अधिकारियों पर कसेगा शिकंजा
मंत्री ने यह भी साफ कर दिया है कि इस बैठक के बाद अगर किसी भी अंचल कार्यालय से लापरवाही या जनता को परेशान करने की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सरकार का एकमात्र लक्ष्य आम लोगों को बिना किसी दफ्तर के चक्कर काटे उनकी जमीन के कागजात और न्याय दिलाना है। इस महाबैठक से पूरे राज्य की राजस्व व्यवस्था में बड़े बदलाव की उम्मीद है। बैठक के एजेंडे को लेकर विभाग के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि मंत्री इस बार केवल काम की समीक्षा नहीं करेंगे, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी कड़ा रुख अपनाएंगे। दाखिल-खारिज और जमाबंदी के नाम पर आम जनता से अवैध वसूली की शिकायतों को लेकर कुछ अंचलों की लिस्ट तैयार की गई है।
‘सहयोग पोर्टल’ से कम हुई दफ्तरों में भीड़
जनता दरबार की जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि पहले जब सुनवाई होती थी, तो दफ्तरों में 400 से ज्यादा लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती थी। इतनी भीड़ के कारण समय पर लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाता था। लेकिन मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शुरू किए गए ‘सहयोग पोर्टल’ के बाद अब लोग घर बैठे ही अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि अब हर महीने होने वाले सहयोग कार्यक्रम में दफ्तर आने वाले लोगों की संख्या घटकर सिर्फ 30 से 40 रह गई है और शिकायतों का निपटारा भी तेजी से हो रहा है।
धारा 370 को हटाना राष्ट्र की एकता के लिए ऐतिहासिक कदम
अपने संबोधन की शुरुआत में डॉ. दिलीप जायसवाल ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को याद करते हुए राष्ट्र की एकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नारा— “एक देश में दो निशान, दो विधान, दो संविधान नहीं चलेगा” सिर्फ एक नारा नहीं था, बल्कि पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का संकल्प था। इसी सोच के साथ केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और रहेगा। इस फैसले से वहाँ के लोगों को भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का मौका मिला है।
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