झारखंड में थम नहीं रही बिजली चोरी: एक साल में 24 हजार से ज्यादा केस, 45 करोड़ की चोरी उजागर

रांची:  झारखंड में बिजली चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच राज्यभर में 24,491 बिजली चोरी के मामले दर्ज किए गए। इस दौरान 45.53 करोड़ रुपए की बिजली चोरी पकड़ी गई है। यानी हर दिन औसतन 12.50 लाख रुपए की बिजली चोरी हो रही है।

जेबीवीएनएल ने बिजली चोरी रोकने के लिए राज्य, प्रमंडल और जिला स्तर पर विशेष छापेमारी अभियान चलाया। इसके लिए राज्यस्तरीय एंटी पावर थेफ्ट (APT) टीम के साथ कुल 119 टीमें बनाई गईं, जिनमें क्षेत्रीय अधिकारियों को शामिल किया गया था। इन टीमों ने वर्ष भर में 1.32 लाख लोकेशनों पर छापेमारी की, जिसके दौरान बिजली चोरी करते हुए हजारों उपभोक्ता पकड़े गए। कई ऐसे मामले भी सामने आए, जिनमें पहले से कटी हुई बिजली लाइन के बावजूद उपभोक्ता अवैध रूप से बिजली का उपयोग कर रहे थे।

बावजूद इसके राज्य में बिजली चोरी और लाइन लॉस की दर अभी भी 35 प्रतिशत बनी हुई है, जो विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय है। जेबीवीएनएल के महाप्रबंधक श्रवण कुमार ने बताया कि इतनी भारी मात्रा में बिजली की हानि से राजस्व में बड़ा घाटा हो रहा है।

इसी को ध्यान में रखते हुए जेबीवीएनएल ने बिजली दरों में वृद्धि का प्रस्ताव झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा है। विभाग ने 7400 करोड़ रुपए से अधिक का घाटा दर्शाया है, जिसमें बिजली चोरी, लाइन लॉस और वसूली में कमी को प्रमुख कारण बताया गया है। पिछली बार आयोग ने केवल पांच पैसे प्रति यूनिट की दर से वृद्धि की थी, लेकिन इस बार ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। जल्द ही आयोग इस पर फैसला ले सकता है।

राज्य सरकार और बिजली विभाग के लिए यह चुनौती है कि तकनीकी सुधारों और कठोर कार्रवाई के बावजूद बिजली चोरी पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है।


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