Ranchi: झारखंड में आउटसोर्सिंग की नई व्यवस्था लागू: समान वेतन, आरक्षण और पारदर्शिता सुनिश्चित, जयराम महतो ने उठाया था मुद्दा

 

Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य में आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जाने वाली नियुक्तियों को पारदर्शी, व्यवस्थित और जवाबदेह बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सरकार ने ‘झारखंड मैनपावर प्रोक्यूरमेंट (आउटसोर्स) मैनुअल-2025’ को लागू कर दिया है, जो राज्य के सभी विभागों में आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति के लिए मानक प्रक्रिया (एसओपी) को परिभाषित करता है। आउटसोर्सिंग कर्मियों के लिए नियमावली का मुद्दा जयराम महतो ने विधानसभा में उठाया था।

सभी नियुक्तियां अब निर्धारित नियमों के तहत होंगी
अब किसी भी विभाग को आउटसोर्सिंग के माध्यम से जब भी कर्मचारियों की नियुक्ति करनी होगी, तो उसे इसी मैनुअल का पालन करना अनिवार्य होगा। इससे पहले तक आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति प्रक्रिया में एकरूपता नहीं थी, जिससे ना केवल योग्य अभ्यर्थियों को नुकसान होता था, बल्कि कई मामलों में अनियमितता की शिकायतें भी सामने आती थीं।

आरक्षण नीति और स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता
इस मैनुअल के तहत राज्य सरकार की आरक्षण नीति को पूरी तरह लागू किया जाएगा। यदि किसी पद पर केवल एक ही स्थान खाली होता है (एकल पद), तो उसमें स्थानीय अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जाएगी। यह प्रावधान झारखंड के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने की दिशा में सराहनीय कदम माना जा रहा है।

समान वेतन और सुविधाएं सभी के लिए
अब तक आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को समान वेतन और सुविधाएं नहीं मिलती थीं। नए मैनुअल में इस असमानता को दूर करते हुए स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है कि सभी आउटसोर्स कर्मियों को समान वेतन, 14 से 18 दिन का आकस्मिक अवकाश, 180 दिन का मातृत्व अवकाश, 4 लाख रुपये तक का ग्रुप इंश्योरेंस और प्रत्येक वर्ष 3% वेतनवृद्धि दी जाएगी।

जैप आइटी को मिली प्रमुख जिम्मेदारी
इस पूरी व्यवस्था को कारगर और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार ने जैप आइटी (JAP-IT) को मैनपावर मैनेजमेंट सिस्टम तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी है। इस डिजिटल सिस्टम में राज्य भर में काम करने वाली सूचीबद्ध एजेंसियों का डाटाबेस होगा, जिससे विभाग अपनी आवश्यकतानुसार एजेंसी और मैनपावर का चयन कर सकेंगे।

मंजूरी की तीन- स्तरीय व्यवस्था                                                                                              यदि किसी विभाग का आउटसोर्सिंग पर वार्षिक खर्च 2.5 करोड़ रूपए तक है, तो विभागीय सचिव की मंजूरी जरूरी होगी। 2.5 करोड़ से 15 करोड़ रुपये तक के व्यय के लिए विभागीय मंत्री की स्वीकृति लेनी होगी और 15 करोड़ से अधिक की राशि होने पर कैबिनेट से अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा।

इन पदों पर होगी नियुक्ति
नई व्यवस्था के तहत निम्नलिखित तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों पर नियुक्तियां की जा सकेंगी: मल्टी टास्किंग स्टाफ, ड्राइवर, क्लर्क, कंप्यूटर ऑपरेटर, डाटा एंट्री ऑपरेटर, ऑफिस असिस्टेंट, अकाउंटेंट, आईटी असिस्टेंट, हेल्पडेस्क मैनेजर, सॉफ्टवेयर डेवलपर, वेब डिजाइनर, नेटवर्क इंजीनियर, सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपर, ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर, प्रोजेक्ट लीड, कंटेंट राइटर, सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर सहित अन्य कई पदों पर।

समिति की अनुशंसा आवश्यक
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजना एवं गैर-योजना मदों से संचालित परियोजनाओं में आउटसोर्स नियुक्तियों के लिए प्रशासी पदवर्ग समिति की अनुशंसा आवश्यक होगी। हालांकि, स्वायत्त संस्थाओं, लोक उपक्रमों, बोर्डों और निगमों में इस अनुशंसा की अनिवार्यता नहीं होगी।

झारखंड सरकार की यह नई पहल न केवल राज्य में नियुक्तियों को सुव्यवस्थित करेगी, बल्कि इसमें योग्यता, पारदर्शिता और सामाजिक न्याय का समावेश सुनिश्चित किया गया है। इससे हजारों बेरोजगारों को समान अवसर मिलेगा, वहीं विभागों को बेहतर कार्यकुशलता वाला मानव संसाधन उपलब्ध होगा।

 

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