रांची: झारखंड सरकार ने केंद्रीय प्री-बजट बैठक में एक बार फिर 1.36 लाख करोड़ रुपए की बकाया राशि का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। शुक्रवार को राजस्थान के जैसलमेर में आयोजित इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री की उपस्थिति में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने न केवल बजट सुझाव प्रस्तुत किए, बल्कि इस संदर्भ में एक मांग पत्र भी सौंपा।
विकास योजनाओं के लिए केंद्र से सहयोग की मांग
मांग पत्र में झारखंड सरकार ने बकाया राशि की अनिवार्यता पर जोर देते हुए कहा कि अर्धविकसित झारखंड के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार के पास बहुआयामी योजनाओं और एक स्पष्ट विजन की परिकल्पना है। हालांकि, राज्य अपने आय के सीमित आंतरिक स्रोतों से इन योजनाओं को पूर्ण रूप से कार्यान्वित करने में असमर्थ है।

बकाया राशि का विवरण
राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से निम्नलिखित बकाया राशि की मांग की है:
- वॉश्ड कोल रॉयल्टी: 2900 करोड़ रुपए।
- कॉमन कॉज मद: 32 हजार करोड़ रुपए।
- भूमि मुआवजा मद: 1 लाख 1 हजार 142 करोड़ रुपए।
इन कुल राशि को राज्य के जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों और उग्रवाद प्रभावित इलाकों के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।
झारखंड के विकास के लिए विशेष परियोजनाओं की मांग
राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार से रांची-कोलकाता और रांची-पटना के बीच एक्सप्रेस-वे निर्माण की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास को गति देने के लिए अगले पांच वर्षों तक झारखंड को विशेष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
केंद्र सरकार का सहयोग जरूरी
झारखंड सरकार का मानना है कि राज्य के समग्र विकास के लिए केंद्र सरकार का सहयोग बेहद आवश्यक है। वित्त मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि झारखंड के विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार को अपने बजट 2025-26 में इन बकाया राशि को शामिल करना चाहिए।


















