रांची: ईडी के अधिकारियों को मैनेज करने के कथित आरोपों की जांच को लेकर दाखिल याचिका पर अब अगली सुनवाई 6 मार्च को होगी। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई स्थगित कर दी गई।
साथ ही, कोर्ट ने ED अधिकारियों के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक के आदेश को अगली सुनवाई तक बढ़ा दिया है। मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत में हुई। इससे पहले, झारखंड सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा था।
इस आदेश के तहत, रांची पुलिस को पंडरा ओपी, सुखदेव नगर थाना, जगन्नाथपुर थाना, अनगड़ा थाना, मोरहाबादी टीओपी, नामकुम थाना और देवघर थाना की 4 अक्टूबर 2024 से 17 अक्टूबर 2024 तक की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया है। रांची के पंडरा ओपी में कांड संख्या 507/2024 और 508/2024 दर्ज की गई थी।
पहली प्राथमिकी अधिवक्ता सुजीत कुमार द्वारा दर्ज कराई गई थी, जिसमें उन्होंने संजीव कुमार पांडेय, रवि कुमार, प्रशांत, दीवाकर और अन्य पर रंगदारी व अपहरण का आरोप लगाया था।
उनके मुताबिक, 2 अक्टूबर को आरोपित उनके कार्यालय पहुंचे और हथियार दिखाकर जबरन छह करोड़ 40 लाख रुपये लेने का कबूलनामा लिखवाया। इसके बाद, उन्हें गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया और उनकी कार भी छीन ली गई। इसके अलावा, संजीव कुमार पांडेय ने उनके खाते में 11.50 लाख रुपये ट्रांसफर कराए और 54 चेकबुक ले लीं।
दूसरी प्राथमिकी संजीव कुमार पांडेय ने दर्ज कराई थी, जिसमें अधिवक्ता सुजीत कुमार पर ईडी अधिकारियों को मैनेज करने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी का आरोप लगाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीन घोटाला केस की जांच कर रही ईडी को प्रभावित करने के लिए अधिवक्ता सुजीत कुमार ने नामकुम के सीओ प्रभात भूषण सिंह, धनबाद के डीटीओ दीवाकर द्विवेदी और कांके के अंचलाधिकारी जयकुमार राम से करीब छह करोड़ रुपये की ठगी की।
फिलहाल, झारखंड हाईकोर्ट ने दोनों प्राथमिकियों पर पुलिस जांच पर रोक लगा रखी है। अब इस मामले में 6 मार्च को अगली सुनवाई होगी।


















