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Jharkhand Rajya Sabha Result: आखिरकार खत्म हुआ झारखंड राज्यसभा चुनाव का सस्पेंस, बैजनाथ-नाथवानी पहुंचे राज्यसभा

Jharkhand Rajya Sabha Result: 2026 के झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। वोटिंग के बाद जारी आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैजनाथ राम और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी विजयी रहे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस खबर को लिखे जाने के समय रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से औपचारिक घोषणा बाकी थी, लेकिन विधानसभा परिसर में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई थीं।

तीन वोट अमान्य; मुकाबले ने राजनीतिक माहौल गरमाया

विधानसभा के सभी 81 विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में अपने वोट डाले। इनमें से तीन वोट अमान्य घोषित किए गए। उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि परिमल नथवानी को 30 वोट और बैजनाथ राम को 29 वोट मिले। कांग्रेस उम्मीदवार को उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिल सका, जिसके चलते वे चुनावी दौड़ से बाहर हो गए। नतीजों की घोषणा के बाद, विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच वोटों के गणित को लेकर चर्चा तेज हो गई।

क्रॉस-वोटिंग को लेकर अटकलें तेज

नतीजे घोषित होने के बाद राजनीतिक हलकों में क्रॉस-वोटिंग को लेकर अटकलें तेज हो गईं। सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस उम्मीदवार को कुछ सहयोगी दलों के विधायकों का समर्थन नहीं मिला; इसके बजाय, ये वोट निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी को चले गए। हालांकि, किसी भी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है। फिर भी, चुनाव नतीजों ने ‘महागठबंधन’ की रणनीति और आपसी तालमेल पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बीजेपी खेमे में जश्न; नेताओं ने जताया भरोसा

वोटिंग खत्म होने के बाद, बीजेपी समर्थकों ने विधानसभा परिसर में उत्साह दिखाया और जीत का दावा किया। बीजेपी विधायक सीपी सिंह और शशि भूषण मेहता ने पहले ही NDA समर्थित उम्मीदवार की जीत पर भरोसा जताया था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी वोट डालकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लिया। पोलिंग स्टेशन से बाहर निकलते समय उनके हाव-भाव भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बने।

परिमल नथवानी की वापसी और भविष्य के संकेत

परिमल नथवानी इससे पहले 2008 से 2020 तक राज्यसभा में झारखंड का प्रतिनिधित्व कर चुके थे। इसके बाद, वे आंध्र प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा पहुंचे थे। झारखंड से उनकी वापसी को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव से पहले, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना ​​था कि जीत के लिए 28 वोटों की ज़रूरत होगी, जबकि NDA के पास अपने दम पर इतने वोट नहीं थे। इसलिए, अतिरिक्त समर्थन और संभावित क्रॉस-वोटिंग को निर्णायक कारक माना जा रहा था। चुनाव नतीजों ने इन अटकलों को और मज़बूत किया है।

झारखंड की राजनीति पर संभावित असर

राज्यसभा चुनाव के नतीजे सिर्फ़ दो सीटों तक ही सीमित नहीं हैं; इनसे राज्य की गठबंधन राजनीति के बारे में भी अहम संकेत मिलते हैं। आने वाले दिनों में, इन नतीजों का असर राजनीतिक रणनीतियों, पार्टियों के आपसी रिश्तों और विधानसभा की कार्यप्रणाली पर देखने को मिल सकता है।

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