नालंदा की तेल्हारा पंचायत बनी Poverty Free Model, महिला उद्यमिता और रोजगार से बदली ग्रामीण तस्वीर

नालंदा की तेल्हारा पंचायत स्थानीय उद्यमिता, महिला स्वयं सहायता समूह और सामुदायिक भागीदारी के दम पर गरीबी मुक्त पंचायत का मॉडल बनी। 1000 से अधिक लोग स्थानीय रोजगार से जुड़े।


Poverty Free Model पटना: बिहार की पंचायतें अब स्थानीय संसाधनों, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक भागीदारी के दम पर ग्रामीण विकास की नई मिसाल पेश कर रही हैं। नालंदा जिले की तेल्हारा पंचायत सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (एलएसडीजी) की थीम-1 ‘गरीबी मुक्त पंचायत’ के तहत एक प्रेरक मॉडल बनकर उभरी है। पंचायती राज विभाग और निजी संस्था सी-थ्री के सहयोग से यहां ग्रामीणों की जरूरतों के अनुरूप आजीविका और विकास कार्यों को बढ़ावा दिया गया है।

9,367 की आबादी वाली इस पंचायत में 4,700 से अधिक पुरुष और करीब 4,500 महिलाएं निवास करती हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की साक्षरता दर 72.88 प्रतिशत रही, जो राज्य के औसत 61.80 प्रतिशत से लगभग 11 प्रतिशत अधिक है।

Poverty Free Model: एक हजार से अधिक लोगों को स्थानीय उद्यमों से मिला रोजगार

तेल्हारा पंचायत की मुखिया प्रतिमा देवी के नेतृत्व में कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और लघु उद्योगों को प्रोत्साहन दिया गया है। पंचायत में ईंट भट्ठा, आभूषण की दुकानें, टाइल्स एवं ग्रेनाइट कारोबार, पेट्रोल पंप, चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग, पारंपरिक वाद्य यंत्र निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा स्टील और लकड़ी के फर्नीचर निर्माण जैसे व्यवसाय तेजी से विकसित हुए हैं।

इन गतिविधियों के चलते एक हजार से अधिक लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार मिला है। तेल्हारा का हाट बाजार अब नालंदा, पटना, जहानाबाद सहित आसपास के कई क्षेत्रों के लिए प्रमुख व्यापारिक केंद्र बन चुका है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पंचायत में तीन दर्जन सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं।


Key Highlights

  • नालंदा की तेल्हारा पंचायत बनी ‘गरीबी मुक्त पंचायत’ का मॉडल।

  • 1000 से अधिक ग्रामीण स्थानीय उद्यमों और रोजगार से जुड़े।

  • 170 स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर।

  • कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और छोटे उद्योगों को मिला बढ़ावा।

  • पर्यटन आधारित आजीविका विकसित करने की भी तैयारी।


Poverty Free Model:महिला स्वयं सहायता समूहों ने बढ़ाई आर्थिक ताकत

तेल्हारा पंचायत में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी लगातार बढ़ रही है। यहां 170 स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे जुड़ी महिलाएं पैंट-टीशर्ट, लेदर जैकेट, एल्युमीनियम बर्तन, पेपर प्लेट, मशरूम उत्पादन समेत कई छोटे उद्योगों के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं।

इसके अलावा पंचायत में करीब 150 परिवार बकरी पालन से जुड़े हैं, जबकि 450 से अधिक लोग दुग्ध उत्पादन का कार्य कर रहे हैं। सूअर पालन, मुर्गी पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां भी ग्रामीणों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

Poverty Free Model:पर्यटन आधारित आजीविका की भी बन रही संभावनाएं

मुखिया प्रतिमा देवी ने बताया कि पंचायत में विकास कार्यों के साथ स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि तेल्हारा क्षेत्र में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवशेष मिले हैं, जिन्हें नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालय से भी प्राचीन माना जा रहा है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि बौद्ध शिक्षा केंद्र के रूप में प्रसिद्ध इस क्षेत्र का पर्यटन विकास होने पर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे। इससे पंचायत की आर्थिक स्थिति और अधिक मजबूत होगी।

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