Patna News: फॉर्मर्स निबंधन महाअभियान में रिवीजनल सर्वे वाले जिलों की स्थिति बेहतर, जाने का बाकी का कैसा है हाल

Patna News: राज्य में एग्रीस्टैक के अंतर्गत चल रहे फार्मर्स रजिस्ट्रेशन महाअभियान की प्रगति की समीक्षा में यह तथ्य सामने आया है कि रिविजनल सर्वे (RS) वाले जिले का प्रदर्शन कैडस्ट्रल सर्वे (CS) वाले जिलों की तुलना में बेहतर हैं. इस वर्ष 9 जनवरी रात्रि 8 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, फार्मर्स रजिस्ट्रेशन के कन्वर्जन रेट, रजिस्ट्रेशन की गति तथा राज्य स्तरीय रैंकिंग में सुधार के मामले में आरएस जिलों की स्थिति अधिक सुदृढ़ पाई गई है. इसका मुख्य कारण इन जिलों में भूमि अभिलेखों की अपेक्षाकृत बेहतर गुणवत्ता, अद्यतन जमाबंदी एवं कम उत्तराधिकार विवाद है.

Patna News: आरएस जिलों में उल्लेखनीय उपलब्धि

फार्मर्स रजिस्ट्रेशन में 100 प्रतिशत या उससे अधिक उपलब्धि प्राप्त करने वाले जिलों में मुजफ्फरपुर, वैशाली, अररिया, भागलपुर एवं कटिहार जैसे जिले प्रमुख रूप से शामिल हैं. ये सभी रिविजनल सर्वे से आच्छादित हैं. इन जिलों में भूमि अभिलेखों की स्पष्टता के कारण फार्मर्स रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में न्यूनतम बाधाएं सामने आ रही हैं.

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Patna News: सीएस जिलों में संरचनात्मक बाधाएं

वहीं पूर्वी चंपारण, जहानाबाद, पटना, लखीसराय एवं मुंगेर जैसे कैडस्ट्रल सर्वे प्रधान जिलों में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन की गति अपेक्षाकृत धीमी पाई गई है. इन जिलों में उत्तराधिकार के लंबित मामलों, संयुक्त जोत, भू-खण्डों के अत्यधिक विखंडन तथा पुराने एवं त्रुटिपूर्ण अभिलेखों के कारण रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग रहा है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने यह स्पष्ट किया गया है कि यह स्थिति प्रशासनिक शिथिलता का परिणाम नहीं, बल्कि पुरानी एवं संरचनात्मक अभिलेखीय चुनौतियों के कारण उत्पन्न हुई है.

Patna News: रैंकिंग में भी अंतर से यह स्थिति आती है सामने

8 और 9 जनवरी के बीच जिलों की रैंकिंग में हुए परिवर्तन से भी यही स्थिति सामने आती है. कैमूर, भोजपुर, भागलपुर एवं वैशाली जैसे आरएस जिलों में उल्लेखनीय रैंकिंग में सुधार दर्ज किया गया है. जबकि नालंदा, पटना, जहानाबाद एवं जमुई जैसे सीएस जिलों में रैंकिंग में ठहराव अथवा गिरावट देखी जा रही है.

Patna News: नीति एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण

एग्रीस्टैक प्रणाली में किसानों के निबंधन के लिए साफ भू-खण्ड, स्पष्ट स्वामित्व एवं न्यूनतम मैनुअल हस्तक्षेप आवश्यक है. यह रिविजनल सर्वे वाले जिलों में अपेक्षाकृत सहज रूप से उपलब्ध हैं. इसी के दृष्टिगत विभाग के जरिए निर्णय लिया गया है कि  जिलों में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन को गति देने के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन लगाकर परिमार्जन और दाखिल–खारिज के साथ मौजूदा ई–केवाईसी के प्रभावी कन्वर्जन पर विशेष बल दिया जाएगा. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि आरएस जिलों के लिए आक्रामक लक्ष्य यथार्थपरक हैं, जो राज्य स्तर पर समग्र उपलब्धि सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होंगे. यह स्पष्ट है कि राज्य में एग्रीस्टैक के अंतर्गत फार्मर्स रजिस्ट्रेशन का प्रदर्शन कैडस्ट्रल सर्वे एवं रिविजनल सर्वे की संरचना से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है. जहां आरएस जिले क्रियान्वयन के लिए अधिक अनुकूल हैं, वहीं सीएस जिलों में दशकों पुरानी अभिलेखीय विरासत के कारण प्रक्रिया अपेक्षाकृत अधिक समय ले रही है. यहां जोत में सुधार को राज्य सरकार चुनौती मानते हुए उसमें सुधार के उपाय में जुटी है.

Patna News: ये बताते हैं आंकड़े

कुल पंजीकरण संख्या के आधार पर मुजफ्फरपुर जिला 75,568 पंजीकरण के साथ राज्य में पहले स्थान पर है. इसके बाद वैशाली (60,697), कटिहार (58,611), पूर्णिया (56,030) और भागलपुर (55,314) जैसे आरएस जिले अग्रणी हैं. अररिया, गया और सीतामढ़ी ने भी 45 हजार से अधिक पंजीकरण कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया. वहीं आरएस पार्शियल श्रेणी में समस्तीपुर (35,767), सुपौल (33,185) और बांका (30,174) ने अच्छी प्रगति दर्ज की. CS जिलों में पूर्वी चंपारण (51,145), दरभंगा (44,834), बेगूसराय (41,932) और नालंदा (38,146) की संख्या तक पहुंचा है. कुछ सीएस जिलों जैसे अरवल, जहानाबाद और लखीसराय में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन की संख्या अपेक्षाकृत कम है.

Patna News: मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने ये कहा

उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि एग्रीस्टैक के अंतर्गत फार्मर्स रजिस्ट्रेशन की प्रगति का विश्लेषण यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भूमि अभिलेखों की गुणवत्ता का सीधा प्रभाव रजिस्ट्रेशन की गति और कन्वर्जन पर पड़ता है. रिविजनल सर्वे (RS) वाले जिलों में अपेक्षाकृत साफ और अद्यतन अभिलेख होने के कारण फार्मर्स रजिस्ट्रेशन तेजी से हो रहा है. उन्होंने कहा कि कैडस्ट्रल सर्वे (CS) वाले जिलों में उत्तराधिकार, संयुक्त जोत और पुराने अभिलेखों से जुड़ी संरचनात्मक चुनौतियां हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार विशेष रणनीति के साथ कार्य कर रही है. सीएस जिलों में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन को गति देने के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन के साथ परिमार्जन एवं दाखिल–खारिज की आसान सुविधा तथा मौजूदा e-KYC के प्रभावी कन्वर्जन पर विशेष बल दिया जा रहा है. यह किसी प्रकार की प्रशासनिक कमजोरी नहीं, बल्कि दशकों पुरानी अभिलेखीय विरासत से जुड़ी स्वाभाविक चुनौती है.

उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य हर किसान को यूनिक किसान आईडी से जोड़कर केंद्र एवं राज्य सरकार की सभी योजनाओं का सीधा और पारदर्शी लाभ सुनिश्चित करना है. आरएस और सीएस दोनों प्रकार के जिलों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लक्ष्य निर्धारण किया जा रहा है, ताकि राज्य स्तर पर एग्रीस्टैक महाअभियान को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा सके और राज्य के सभी किसान डिजिटल रूप से सशक्त बनें.

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