झारखंड में राशन कार्ड ई-केवाईसी की प्रक्रिया धीमी, राज्य सरकार ने समय सीमा बढ़ाने की मांग की

रांची:  झारखंड समेत पूरे देश में राशन कार्ड धारकों (पीला व गुलाबी कार्ड) के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया अनिवार्य की गई है। यह कदम राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पारदर्शिता सुनिश्चित करने, दोहराव रोकने और लाभुकों को निर्बाध सब्सिडी आवंटन के उद्देश्य से उठाया गया है। हालांकि, झारखंड में तकनीकी बाधाओं और अन्य प्रशासनिक चुनौतियों के कारण इस प्रक्रिया की गति बेहद धीमी बनी हुई है।

राशन कार्ड ई-केवाईसी की धीमी प्रगति, लाखों लाभुक अब भी बाकी

राज्य में 2.63 करोड़ राशन कार्ड लाभुक हैं, जिनमें से लगभग 60 लाख लोगों का अब भी ई-केवाईसी नहीं हो सका है। खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा 21 से 27 मार्च तक विशेष अभियान चलाया गया, लेकिन इस दौरान सभी लाभुकों को कवर नहीं किया जा सका।

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को 31 मार्च तक ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। अब जब इस समय सीमा में मात्र दो दिन शेष हैं, तो झारखंड की मौजूदा प्रगति को देखते हुए तय समय तक सभी लाभुकों का ई-केवाईसी पूरा कर पाना मुश्किल नजर आ रहा है।

झारखंड में राशन कार्ड ई-केवाईसी की प्रक्रिया धीमी, राज्य सरकार ने समय सीमा बढ़ाने की मांग की
झारखंड में राशन कार्ड ई-केवाईसी की प्रक्रिया धीमी, राज्य सरकार ने समय सीमा बढ़ाने की मांग की

क्यों जरूरी है राशन कार्ड का ई-केवाईसी?

राज्य सरकार ने केंद्र से राशन कार्ड का ई-केवाईसी सीमा बढ़ाने का किया अनुरोध

झारखंड खाद्य आपूर्ति विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने कहा कि झारखंड की परिस्थितियां देश के अन्य राज्यों से अलग हैं। तकनीकी समस्याओं और धीमी गति से हो रही ई-केवाईसी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय खाद्य आपूर्ति विभाग ने अन्य राज्यों में शत-प्रतिशत ई-केवाईसी के लिए समय सीमा 30 अप्रैल तक बढ़ाने का संकेत दिया है, हालांकि इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सभी लाभार्थियों के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया अनिवार्य की गई है। इसके पीछे मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना, अपात्र लोगों को मिलने वाले लाभ को रोकना और राशन वितरण को अधिक प्रभावी बनाना है। यदि किसी राज्य में 100% ई-केवाईसी पूरा नहीं होता है, तो उस राज्य के लिए केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी पर रोक लगाने की संभावना बन सकती है। हालांकि, कानून के तहत पूरी तरह से सब्सिडी बंद करना फिलहाल मुश्किल हो सकता है।

झारखंड सरकार अब केंद्र से ई-केवाईसी की समय सीमा बढ़ाने की अपील करने जा रही है ताकि सभी लाभुकों को इस प्रक्रिया से जोड़ा जा सके और उन्हें समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा सके।

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