बिहार के 19 जिलों के 171 प्रखंडों में पंचायत प्रतिनिधियों, जीविका दीदियों और सीथ्री के प्रयास से स्कूल छोड़ चुकी बालिकाएं फिर शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ रही हैं।
School Enrollment Campaign पटना:बिहार में पंचायतों को महिला हितैषी और बाल हितैषी बनाने की दिशा में एक अनूठी पहल रंग ला रही है। पंचायती राज विभाग के मार्गदर्शन में पंचायत प्रतिनिधियों, तकनीकी सहयोगी संस्था सीथ्री, जीविका दीदियों, विद्यालय प्रबंधन और स्थानीय समुदाय के संयुक्त प्रयास से राज्य के 19 जिलों के 171 प्रखंडों में शिक्षा से वंचित बालिकाओं को दोबारा विद्यालयों से जोड़ा जा रहा है। यह अभियान न केवल शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि बालिकाओं के भविष्य को नई दिशा भी दे रहा है।
School Enrollment Campaign:जीविका दीदियां बनीं बदलाव की मजबूत कड़ी
नालंदा, पटना, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, रोहतास, नवादा, बक्सर, पूर्वी चंपारण, भोजपुर, सारण, किशनगंज, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, लखीसराय, शेखपुरा, सीतामढ़ी और शिवहर सहित 19 जिलों के 171 प्रखंडों में जीविका दीदियां घर-घर जाकर स्कूल छोड़ चुकी बालिकाओं की पहचान कर रही हैं। वे अभिभावकों से संवाद कर शिक्षा का महत्व समझा रही हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में भी सहयोग कर रही हैं। पंचायत प्रतिनिधियों और विद्यालय प्रबंधन के साथ समन्वय से कई बालिकाएं दोबारा स्कूल पहुंची हैं।
Key Highlights:
बिहार के 19 जिलों के 171 प्रखंडों में बालिकाओं के पुनः नामांकन का अभियान सफल।
पंचायत प्रतिनिधि, जीविका दीदियां और सीथ्री के समन्वय से मिली बड़ी सफलता।
असुरक्षा, गरीबी और सामाजिक कारणों से स्कूल छोड़ने वाली बेटियां फिर लौटीं पढ़ाई की ओर।
कई पंचायतों में दस्तावेज बनवाकर पहली बार कराया गया छात्राओं का नामांकन।
मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा, हर बेटी की स्कूल वापसी पूरे समाज की सफलता है।
School Enrollment Campaign:छह प्रेरक कहानियों ने दिखाई बदलाव की तस्वीर
पटना जिले के नौबतपुर प्रखंड की निशु कुमारी ने विद्यालय आने-जाने के दौरान असुरक्षा महसूस होने पर पढ़ाई छोड़ दी थी। पंचायत प्रतिनिधियों, जीविका दीदियों और स्कूल प्रशासन ने सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया, जिसके बाद वह दोबारा विद्यालय लौट आई।
मुजफ्फरपुर जिले की नंदिनी कुमारी सामाजिक दबाव के कारण पढ़ाई छोड़ चुकी थी। लगातार संवाद और समझाइश के बाद परिवार की सोच बदली और उसका पुनः नामांकन कराया गया।
मधुबनी जिले की गुलशन खातून के पिता के निधन के बाद आर्थिक संकट के कारण पढ़ाई छूट गई थी। आवश्यक दस्तावेज तैयार कराकर उसका दोबारा विद्यालय में दाखिला कराया गया।
इसी जिले की संध्या कुमारी मां की मृत्यु के बाद घरेलू जिम्मेदारियों में उलझकर स्कूल नहीं जा पा रही थी। पंचायत और जीविका समूह के प्रयासों से वह फिर शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ गई।
पटवारा दक्षिणी पंचायत की काजल और आंचल ने पहले कभी विद्यालय नहीं देखा था। आवश्यक दस्तावेजों की व्यवस्था कर दोनों बहनों का पहली बार विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित किया गया।
नालंदा जिले की सुगंधा कुमारी भी पढ़ाई से दूर हो गई थी, लेकिन सामूहिक प्रयास से वह फिर स्कूल लौटी। आज वह किशोरी समूह की सक्रिय सदस्य बनकर अन्य बालिकाओं को शिक्षा और बाल विवाह के खिलाफ जागरूक कर रही है।
School Enrollment Campaign:हर बेटी की स्कूल वापसी समाज की सफलता : दीपक प्रकाश
पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार पंचायतों को समग्र ग्रामीण विकास और सामाजिक परिवर्तन का केंद्र बना रही है। उन्होंने कहा कि पंचायतें केवल आधारभूत संरचना के निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक बदलाव की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी बालिका की पढ़ाई गरीबी, असुरक्षा, सामाजिक रूढ़िवादिता या संसाधनों की कमी के कारण नहीं रुकनी चाहिए। पंचायत प्रतिनिधियों, जीविका दीदियों और स्थानीय समुदाय का समन्वित प्रयास महिला हितैषी एवं बाल हितैषी पंचायतों की अवधारणा को साकार कर रहा है। प्रत्येक बेटी की विद्यालय में वापसी पूरे समाज की साझा सफलता है।
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