सीयूजे में भारत–मालदीव संबंधों पर विशेष व्याख्यान, शोधार्थियों ने अवसर और चुनौतियों पर गहन विश्लेषण किया, प्राध्यापकों ने दिए सुझाव।
रांची : सीयूजे के अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग और राजनीति अध्ययन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में भारत–मालदीव संबंधों पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह व्याख्यान ‘इंटरनेशनल रिलेशन रिसर्च क्लब’ के बैनर तले आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य शोधार्थियों में विश्लेषणात्मक क्षमता का विकास और विभाग में गुणात्मक चर्चा की परंपरा को बढ़ावा देना है।
इस श्रृंखला के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग की शोधार्थी पूजा कुमारी ने “बदलते परिप्रेक्ष्य में भारत–मालदीव संबंध: अवसर और चुनौतियां” विषय पर अपना शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने भारत और मालदीव के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग, मालदीव का सामरिक महत्व, चीन की उपस्थिति के प्रभाव तथा ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया।
Key Highlights
सीयूजे में भारत–मालदीव संबंधों पर विशेष व्याख्यान
शोधार्थी पूजा कुमारी ने रखा बहुआयामी विश्लेषण
भारत–चीन प्रतिद्वंद्विता और मालदीव का सामरिक महत्व चर्चा में
प्राध्यापकों ने विदेशी नीति और क्षेत्रीय चुनौतियों पर सुझाव दिए
छात्रों और शोधार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की
कार्यक्रम में दोनों विभागों के संयुक्त विभागाध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार गुप्ता, सहायक प्राध्यापक डॉ. विभूति भूषण विश्वास, डॉ. अशोक निमेष और डॉ. अपर्णा समेत सभी शोधार्थी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
व्याख्यान के बाद प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्राध्यापकों ने कई प्रासंगिक सुझाव दिए। डॉ. आलोक ने भारत–चीन प्रतिद्वंद्विता के परिप्रेक्ष्य में उपमहाद्वीप के छोटे देशों को मिलने वाले अवसरों का उल्लेख किया। डॉ. विभूति भूषण ने मालदीव के घरेलू राजनीतिक–सामाजिक अंतर्द्वंदों और उनकी विदेश नीति पर प्रभाव का विश्लेषण किया। डॉ. अपर्णा ने भारतीय विदेश नीति के क्रियान्वयन की चुनौतियों पर प्रकाश डाला, वहीं डॉ. अशोक निमेष ने प्रधानमंत्री की हालिया मालदीव यात्रा को भारत–मालदीव संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।
अंत में सभी प्राध्यापकों ने ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया और शोधार्थियों को शुभकामनाएं दीं।


















