रांची: सुप्रीम कोर्ट ने NEET-PG काउंसलिंग में सीट ब्लॉकिंग की बढ़ती शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए निजी और डीम्ड यूनिवर्सिटी को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि अब सभी संस्थानों को काउंसलिंग से पहले फीस की पूरी जानकारी देना अनिवार्य होगा।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने 29 अप्रैल को दिए आदेश में कहा कि सीट ब्लॉकिंग एक गंभीर प्रणालीगत खामी है, जिससे योग्य छात्रों को नुकसान होता है और प्रवेश प्रक्रिया मेरिट के बजाय संयोग बन जाती है।
कोर्ट ने ऑल इंडिया कोटा और राज्य स्तरीय काउंसलिंग को एक समान बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समन्वित काउंसलिंग कैलेंडर लागू करने का निर्देश भी दिया है। साथ ही पारदर्शिता के लिए रॉ स्कोर, आंसर की और नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला को सार्वजनिक करने का आदेश भी दिया गया है।
कोर्ट ने सीट ब्लॉकिंग करने वाले छात्रों और संस्थानों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। यह फैसला उत्तर प्रदेश सरकार की याचिका पर आया, जिसमें इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने दो छात्रों को मुआवजा देने और सीट ब्लॉकिंग में संलिप्त लोगों पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
इस बीच, नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में समस्याओं का सामना करने वाले छात्रों को लेकर एनटीए (NTA) ने भी रिपोर्ट तलब की है। 4 मई को मप्र के इंदौर में खराब मौसम के कारण 24 केंद्रों पर परीक्षा प्रभावित हुई थी। मप्र हाई कोर्ट की इंदौर पीठ को एनटीए ने बताया कि विशेष जांच कमेटी गठित की गई है। रिपोर्ट के आधार पर पुनः परीक्षा कराने पर निर्णय लिया जाएगा। अगली सुनवाई 26 मई को होगी।


















