गया : बिहार के गया जिले में अनोखी मिसाल पेश की जा रही है। करीब 300 सालों से राजपूत के द्वारा मजार की रक्षा व देखभाल की जा रही है। तकरीबन 150 राजपूत परिवार के लोग ना सिर्फ मजार की रक्षा करते हैं बल्कि हर हिंदू मुस्लिम पर्वों में इसे सजाते हैं और अकीदत भी करते हैं। एक और जहां हिंदू मुस्लिम की भावनाओं को आहत करने का सबसे बड़ा माध्यम मंदिर या मस्जिद मजार होते हैं। किंतु मुस्लिम फकीर की मजार की रक्षा डेढ़ सौ राजपूत परिवार द्वारा किया जाना सांप्रदायिक सद्भाव की एक बड़ी मिशाल है। गया-बोधगया सड़क मार्ग के केंदुई गांव में या फिर दूर-दूर तक एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहते हैं। यहां चारों तरफ से मंदिर है और बीच में एक मजार है और यह पूरा गांव राजपूत का गांव है।
यह मजार अपने आप में बेहद खास है, सौहार्द के वातावरण की एक मिसाल भी है
यह मजार अपने आप में बेहद खास है, सौहार्द के वातावरण की एक मिसाल भी है। 300 सालों तक एक मजार की रक्षा करना और इसे पुराने अस्तित्व में कायम रखना यह एक बड़ी बात है। इस तरह इस मजार से मुस्लिम ही नहीं बल्कि बड़ी तादाद में हिंदुओं की भी आस्था जुडी हुई है। इस संबंध में केंदुई गांव के समाजसेवी संतोष सिंह बताते हैं कि हमारे गांव में मुस्लिम फकीर बाबा हजरत अनवर शाह की मजार है। जिसे राजपूत परिवार के लोग इसकी रक्षा और देखभाल करते हैं। यहां मंदिरों की तरह अकीदत भी करने आते हैं। मुस्लिम या हिंदू के पर्व हो इस मजार को सजाया जाता है और अकीदत की जाती है चादरपोशी और अगर बतिया भी जलाई जाती है।
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बजरंगबली, देवी मंदिर और सूर्य मंदिर, चारों ओर से मंदिर है और बीच में मजार है
उन्होंने कहा कि रमजान का महीना अभी चल रहा है तो इस मजार के बाहरी भीतरी हिस्से पर पेंट पुचाड़ा कराया जाता है। वह बताते हैं कि यहां बजरंगबली, देवी मंदिर और सूर्य मंदिर, चारों ओर से मंदिर है और बीच में मजार है। हम लोग किसी प्रकार का भेदभाव की भावना नहीं रखते हैं। हमारी आस्था सदियों से पूर्वजों से आस्था जुड़ी हुई है जो आज भी जारी है। वे बताते हैं कि बाबा हजरत अनवर शाह फकीर थे कहा जाता है कि उन्हें ईश्वरीय शक्ति थी इलाके की विपत्तियां को भी क्षण भर में दूर कर देते थे एक बार जब अकाल पड़ गया। बारिश नहीं हो रही थी। अन के लाले पड़ने लगे थे और तरह-तरह के विपत्तिया आ रही थी। उसी स्थिति में बाबा हजरत अनवर शाह ने लोगों से कहा था कि लाठा कुड़ी में आता रखो। आटा गीला होता है तो उसी का रोटी खाएंगे। ग्रामीणों ने जब ऐसा किया तो कुछ ही देर बाद मूसलाधार बारिश शुरू हो गई और काल का साया हटने लगा। यहां जो लोग मजार में मत्था टेक कर अगरबत्ती जलाकर मन्नत मांगने वाले कभी खाली हाथ नहीं लौटते।
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आशीष कुमार की रिपोर्ट
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