रांची: झारखंड में अनुसूचित जाति के छात्रों और समाज के सदस्यों को जाति और आवासीय प्रमाण पत्र बनवाने में आ रही भारी दिक्कतों और अन्य संवैधानिक अधिकारों की उपेक्षा को लेकर आज अखिल भारतीय अनुसूचित जाति समन्वय समिति के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की। इस अवसर पर समिति ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपा और SC समाज की समस्याओं और वर्षों से लंबित मांगों को विस्तार से रखा।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि अनुसूचित जाति आयोग का गठन तो हुआ है लेकिन उसका पूर्ण गठन नहीं हो पाया है। पदाधिकारियों की नियुक्ति नहीं होने से आयोग निष्क्रिय पड़ा है, जिससे SC समुदाय को न्याय और सलाह देने वाली संस्था प्रभावी रूप से काम नहीं कर पा रही। उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि आयोग का शीघ्र पूर्ण गठन कराया जाए।
इसके अतिरिक्त प्रतिनिधिमंडल ने राजधानी रांची में 500 बेड वाला एक छात्रावास बनवाने की भी मांग की ताकि राज्यभर से पढ़ने आए SC वर्ग के छात्र-छात्राओं को आवासीय संकट से राहत मिल सके। साथ ही बीपीएल कोटे के तहत नामांकन के लिए वार्षिक आय सीमा ₹72,000 से बढ़ाकर ₹2 लाख किए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
प्रमुख मांगों में यह भी शामिल था कि CNT एक्ट के तहत अनुसूचित जाति के भूमिहीनों को बैंक लोन आसानी से मिल सके, इसके लिए सरल प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन में यह भी बताया गया कि वर्तमान में जातीय, आवासीय और आय प्रमाण पत्रों के निर्गमन में ज़मीन संबंधित खतियान की अनिवार्यता के कारण अधिकांश भूमिहीन SC परिवारों को वंचित कर दिया जाता है।
प्रतिनिधियों का कहना है कि छात्रों को दाखिले, छात्रवृत्ति और सरकारी योजनाओं का लाभ सिर्फ इस वजह से नहीं मिल पा रहा कि उनका प्रमाण पत्र नहीं बन रहा है। समिति ने राज्यपाल से यह भी आग्रह किया कि सरकार को इन मुद्दों पर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए और एक समर्पित नीति बनाकर समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।
समिति ने मुख्यमंत्री से भी शीघ्र मिलकर समस्याओं को रखने की योजना बनाई है। उनका कहना है कि चुनावी घोषणापत्र में SC समुदाय के लिए कई वादे किए गए थे, परंतु आज तक अधिकांश वादों पर अमल नहीं हुआ।
राज्यपाल ने प्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को राज्य सरकार तक पहुँचाया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रयास किए जाएंगे।


















