‘ठगा महसूस कर रहे हरिजन जाति के लोग’, वित्त मंत्री ने सीएम हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

रांची. अनुसूचित जाति राज्य आयोग तथा अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद को पुनर्जीवित करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को प्रदेश के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा कि राज्य के बने हुए 25 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन अब तक इस जाति के लोग सामाजिक और आर्थिक रूप से काफी पिछड़े हुए हैं। अनुसूचित जाति की संख्या पूरे राज्य में लगभग 50 लाख से अधिक हैं। ऐसे में इस समाज के उत्थान के लिए सरकार जल्द फैसला करें।

दरअसल, अपने पत्र में वित्त मंत्री ने लिखा, “झारखण्ड राज्य गठन के लगभग 25 वर्ष पूरा होने जा रहा है। झारखण्ड में अनुसूचित जाति की संख्या लगभग 50 लाख है। आज भी झारखण्ड के हरिजन जाति के लोग सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण से काफी पिछड़े हुए हैं। अधिकांशतः हरिजन वर्ग के लोग भूमिहीन हैं और मजदूरी कर अपनी जीविका चलाते हैं। सफाई कर्मचारी, चर्मकार, भुईयां, मुसहर जाति की स्थिति राज्य के आदिम जनजाति से भी बदतर है। घोर गरीबी के कारण महिलाएं व बच्चे खून की कमी और कुपोषण से ग्रसित हैं। उनके आर्थिक उत्थान के लिए चलाई जा रही योजनाएं मुर्गी, बकरी एवं सूकर पालन तक हीं सीमित है।”

ठगा-ठगा सा महसूस कर रहे हरिजन जाति के लोग

पत्र में आगे लिखा है, “विदित है कि 2019 के विधान सभा चुनाव में हरिजन जाति के वोट प्राप्त करने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में भाजपा शासन काल में अनुसूचित जाति आयोग का गठन किया गया था। आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति भी कर दी गई थी। परन्तु आयोग में किसी भी पदाधिकारी के पदस्थापना नहीं होने के कारण अनुसूचित जाति आयोग कभी भी क्रियाशील नहीं रहा। वर्तमान में अनुसूचित जाति राज्य आयोग तो अस्तित्व में ही नहीं है। इसी तरह झारखण्ड के हरिजन जाति के संरक्षण एवं सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए नीति तैयार करने के उद्देश्य से अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद का गठन किया था। नियमावली भी बना दी गयी थी। 17 वर्षों से अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद कल्याण विभाग भी संचिकाओं में ही दर्ज होकर रह गयी। यह झारखण्ड के अनुसूचित जाति के साथ कूर मजाक की तरह है। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि भाजपा शासन काल में राज्य के हरिजन जातियों के साथ राजनैतिक दृष्टिकोण से “उपयोग करो और फेंक दो का सिद्धांत अपनाया गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में ही हरिजन जाति के लिए राज्य आयोग तथा परामर्शदात्री परिषद जिसका उल्लेख वित्तीय वर्ष 2025-26 बजट में भी किया गया है।”

“परिषद” सरकार की संचिका में दब कर रह गयी

आखिरी में पत्र में लिखा, “विदित है कि कल्याण विभाग, झारखण्ड सरकार की अधिसूचना संख्या- 1969, दिनांक- 15/09/2008 को अध्यक्ष, उपाध्यक्ष सहित 17 सदस्यों की समिति भी गठित कर दी गई थी, 2008 में ही परामर्शदात्री परिषद की नियमावली भी बना दी गई थी। झारखण्ड के हरिजन जाति के लोगों में काफी हर्ष और उल्लास था परंतु उनकी खुशी में ग्रहण तब लग गया जब परामर्शदात्री परिषद आज तक अपने नियमित स्वरूप में नहीं आ सका। राज्य के हरिजन जाति के लोगों को इंडिया गठबंधन की सरकार से बहुत उम्मीदें बंधी है।

अतः आपसे अनुरोध है कि “अनुसूचित जाति राज्य आयोग” तथा “अनुसूचित जाति परामर्शदात्री परिषद को पुनर्जीवित करते हुए शीघ्र अधिसूचना जारी करने का कष्ट करें।”

NMACC Cultural Centre: NMACC के 3 साल पूरे: 10,500 कलाकारों से...

NMACC Cultural Centre: भारतीय कला, संस्कृति और दुनिया की चर्चित प्रस्तुतियों को एक मंच पर लाने की दिशा में नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर...

Gaya Kala Namak Rice Farming: सामान्य चावल से कम उत्पादन, फिर...

Gaya Kala Namak Rice Farming: हिमालय की तराई वाले क्षेत्रों में प्रसिद्ध दुर्लभ काला नमक राइस अब बिहार के गया जिले की धरती पर...

Bokaro Hostel Knife Attack: बोकारो हॉस्टल में आखिर क्या हुआ? तीन...

Bokaro Hostel Knife Attack: चीराचास थाना क्षेत्र स्थित क्रिएटिव बॉयज हॉस्टल में चोरी के इरादे से पहुंचे तीन अज्ञात युवकों ने हॉस्टल संचालक समेत...