रांची: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा आलू की आपूर्ति पर रोक लगाए जाने के बाद झारखंड में आलू की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है। बंगाल-झारखंड सीमा पर आलू लदे ट्रकों की कतारें लगी हुई हैं, लेकिन ट्रकों को सीमा पार करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
इस फैसले के चलते झारखंड की मंडियों में आलू की भारी कमी हो गई है। केवल तीन दिनों में आलू की कीमतों में ₹10 प्रति किलो तक की वृद्धि दर्ज की गई है। जहां आमतौर पर जाड़े के मौसम में आलू ₹15 से ₹20 प्रति किलो के बीच मिलता था, अब यह ₹40 से ₹45 तक पहुंच गया है।
बंगाल के आलू की मांग, यूपी का आलू विकल्प नहीं
झारखंड में पश्चिम बंगाल के आलू को उसकी बेहतर गुणवत्ता और स्वाद के लिए पसंद किया जाता है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि उत्तर प्रदेश से आने वाला आलू स्वाद और गुणवत्ता में उतना अच्छा नहीं है और अक्सर खराब स्थिति में आता है। वहीं, बंगाल का आलू साइज और स्वाद में बेहतर होने के कारण ग्राहकों की पहली पसंद बना रहता है।
लोकल उत्पादन पर निर्भरता बढ़ी
मौजूदा स्थिति में स्थानीय आलू ही राहत का साधन है, लेकिन नए आलू को बाजार में आने में अभी 15 दिन और लग सकते हैं। तब तक झारखंड की जनता को इस महंगाई का सामना करना पड़ेगा।
आम जनता का बढ़ता आर्थिक बोझ
आलू हर घर के किचन की जरूरत है और इसे “सब्जियों का राजा” कहा जाता है। लेकिन इसकी बढ़ती कीमतें गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों का बजट बिगाड़ रही हैं। कई लोगों का कहना है कि सब्जियों की बढ़ती कीमतों के कारण वे आलू पर निर्भर हो जाते हैं, लेकिन अब यह भी महंगा हो गया है।


















