रांची: झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच आलू को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 10 दिनों से झारखंड में पश्चिम बंगाल से आलू की आपूर्ति पूरी तरह ठप है। इस स्थिति से निपटने के लिए झारखंड के सब्जी व्यापारियों ने उत्तर प्रदेश और पंजाब से आलू की खेप मंगाई है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। झारखंड की आलू खपत का बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल से आता है, और निर्यात रोक की वजह से बाजार और किसानों में नाराजगी बढ़ रही है।
किसानों का प्रदर्शन और सड़क जाम
पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला में झारखंड-बंगाल सीमा पर किसानों ने विरोधस्वरूप सड़क जाम कर दिया। बागुड़ा पंचायत के आधा दर्जन गांवों के किसानों ने चार घंटे तक सड़क पर प्रदर्शन किया, जिससे यातायात बाधित हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया।
बंगाल सरकार की आपूर्ति रोकने की वजह
पश्चिम बंगाल सरकार ने झारखंड, ओडिशा, और असम को आलू निर्यात पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। बंगाल सरकार का कहना है कि यह कदम जमाखोरी रोकने और स्थानीय बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए उठाया गया है। बंगाल देश में आलू उत्पादन में दूसरे स्थान पर है और सालाना 110 लाख टन से अधिक आलू का उत्पादन करता है।
महंगाई और झारखंड की स्थिति
निर्यात ठप होने के कारण झारखंड में आलू की कीमतों में उछाल की आशंका है। फिलहाल पुराना आलू ₹30-35 प्रति किलो और नया आलू ₹40-50 प्रति किलो बिक रहा है। हालांकि, उत्तर प्रदेश और पंजाब से आए आलू ने स्थिति को कुछ हद तक नियंत्रित किया है, लेकिन इससे परिवहन लागत बढ़ने से कीमतें और बढ़ने का खतरा है।
राजनीतिक हलचल
इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। बीजेपी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए कहा कि वे ममता बनर्जी का गर्मजोशी से स्वागत करते हैं, लेकिन उनकी सरकार झारखंड की जनता को आलू संकट में डाल रही है। मुख्यमंत्री ने इस मामले में पहल करते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है।
आगे की राह
झारखंड और ओडिशा की 65% आलू की जरूरत पश्चिम बंगाल से पूरी होती है। मौजूदा हालात में उत्तर प्रदेश से आपूर्ति का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है। आम जनता को उम्मीद है कि दोनों राज्यों के बीच राजनयिक बातचीत से इस समस्या का समाधान निकलेगा।


















