नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारतीय सेना की हालिया कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जम्मू-कश्मीर के लोग पहलगाम हमले की त्रासदी नहीं भूले हैं, जिसमें 26 मासूम नागरिक मारे गए थे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उस समय जवाब देने का वादा किया था और अब वही जवाब दिया जा रहा है — “ऐसे स्थानों को निशाना बनाकर, जो पिछले 30-35 वर्षों से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और विनाश का केंद्र रहे हैं।”
उमर अब्दुल्ला ने साफ किया कि भारतीय कार्रवाई पाकिस्तान के नागरिक या सैन्य ठिकानों पर नहीं, बल्कि उन आतंकी अड्डों पर केंद्रित है जिनकी पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पहलगाम में हमला नहीं होता, तो आज का यह दिन नहीं आता।
LOC पर बढ़े तनाव के बीच उमर अब्दुल्ला ने राज्य के हालात की समीक्षा करते हुए बताया कि कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में गोलाबारी हुई है, जिससे नागरिकों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं और सीमावर्ती जिलों के डीसी (जिला उपायुक्त) से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हालात की जानकारी ली गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अस्पतालों में दवाइयों और रक्त की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में है और किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यटन स्थलों पर हालात सामान्य हैं और पर्यटकों को प्रदेश छोड़ने की जरूरत नहीं है। “हाईवे खुले हैं, स्कूल शहरों में बंद नहीं किए गए हैं। लोग धैर्य रखें,” उन्होंने कहा।
उमर अब्दुल्ला ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग को खारिज करते हुए कहा, “यह भारत और पाकिस्तान के बीच का मामला है और भारत सरकार को जवाब देने का पूरा अधिकार है।”
इंडस वॉटर ट्रीटी (सिंधु जल संधि) पर भी उन्होंने टिप्पणी की और याद दिलाया कि वे पहले भी इसका विरोध करते रहे हैं, लेकिन फिलहाल इसे मुद्दा न बनाने की सलाह दी।
उन्होंने कहा, “हम युद्ध नहीं चाहते। हम चाहते हैं कि यह तनाव जल्द खत्म हो। अगर पाकिस्तान अपनी बंदूकें चुप कराए, तो भारत भी पीछे हटेगा।”
फिलहाल, राज्य प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है और सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।



















