11 से 20 जून 2026 तक परमा एकादशी, प्रदोष व्रत, मास शिवरात्रि, सोमवती अमावस्या और गुरु पुष्य योग समेत कई धार्मिक पर्वों का विशेष संयोग बन रहा है।
Parama Ekadashi 2026 रांची: पुरुषोत्तम मास के अंतिम पांच दिनों और शुद्ध ज्येष्ठ मास के शुरुआती पांच दिनों में धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ संयोग बनने जा रहा है। 11 जून से 20 जून 2026 तक लगातार व्रत, पूजा, साधना और आराधना का विशेष काल रहेगा। इस दौरान भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, भगवान शिव और अन्य देवी-देवताओं की उपासना से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होने की मान्यता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दस दिनों में आने वाले पर्व और व्रत श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक उन्नति, सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का अवसर लेकर आएंगे।
Key Highlights
11 जून से 20 जून तक लगातार व्रत और पूजा का विशेष योग।
11 जून को दुर्लभ परमा एकादशी का पर्व मनाया जाएगा।
15 जून को साल की पहली सोमवती अमावस्या का महासंयोग।
12 जून प्रदोष व्रत और 13 जून मास शिवरात्रि रहेगी।
18 जून को गुरु पुष्य योग और उमावतार का शुभ संयोग।
ज्योतिषाचार्य प्रणव मिश्रा के अनुसार 11 जून को परमा एकादशी मनाई जाएगी। इसे कमला एकादशी और पुरुषोत्तमी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। यह एक अत्यंत दुर्लभ और विशेष एकादशी मानी जाती है, जो अधिकमास के दौरान लगभग तीन वर्ष में एक बार आती है।
इस वर्ष परमा एकादशी पर शोभन योग का संयोग बन रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना का विशेष विधान है। धार्मिक मान्यता है कि परमा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
मान्यता यह भी है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। रांची के श्याम मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा।
Parama Ekadashi 2026:15 जून को बनेगा सोमवती अमावस्या का दुर्लभ महासंयोग
ज्योतिषाचार्य शालिनी वैद्य के अनुसार इस बार अमावस्या तिथि दो दिनों तक रहेगी। अमावस्या 14 जून को सुबह 11:14 बजे प्रारंभ होगी और 15 जून को सुबह 8:46 बजे तक प्रभावी रहेगी।
चूंकि 15 जून को सोमवार का दिन है, इसलिए इस दिन सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। इसे वर्ष की पहली सोमवती अमावस्या माना जा रहा है। हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का अत्यंत महत्व है और इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य तथा पितरों के निमित्त तर्पण करने का विशेष फल बताया गया है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार गंगा, यमुना तथा अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से अनंत गुना पुण्य प्राप्त होता है। जो श्रद्धालु तीर्थस्थलों तक नहीं पहुंच सकते, वे घर में गंगाजल मिश्रित जल से स्नान कर दान-पुण्य कर सकते हैं।
Parama Ekadashi 2026:प्रदोष व्रत, मास शिवरात्रि और अन्य पर्वों का भी विशेष महत्व
परमा एकादशी के बाद अगले दो दिन भगवान शिव की आराधना को समर्पित रहेंगे। 12 जून को ज्येष्ठ मास का प्रदोष व्रत और 13 जून को मास शिवरात्रि मनाई जाएगी। इन दोनों दिनों में शिवालयों में विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और श्रृंगार पूजन का आयोजन होगा।
इसके बाद 16 जून को करवीर व्रत रखा जाएगा। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इसमें कनेर वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
17 जून को रंभा व्रत मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि सुहागिन महिलाएं संतान सुख, अखंड सौभाग्य और परिवार की खुशहाली की कामना से यह व्रत रखती हैं।
18 जून को गुरु पुष्य योग और उमावतार का शुभ संयोग बनेगा, जिसे खरीदारी, दान-पुण्य और मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बाद 19 जून को महादेव पंचमी और 20 जून को जमाई षष्ठी का पर्व मनाया जाएगा।
धर्माचार्यों के अनुसार 11 से 20 जून तक का यह पूरा कालखंड पूजा-पाठ, जप, तप, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।
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