पटना : बिहार की राजनीति में पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर चल रहा संवैधानिक संकट फिलहाल टलता हुआ दिखाई दे रहा है। सूत्रों के अनुसार, विधान परिषद सदस्य (MLC) देवेश कुमार शुक्रवार शाम चार बजे विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह से मिलकर इस्तीफा दे सकते हैं। बताया जा रहा है कि यह सीट दीपक प्रकाश के लिए खाली की जा रही है, ताकि उन्हें विधान परिषद का चुनाव लड़ाया जा सके।
दीपक प्रकाश वर्तमान में मंत्री हैं, लेकिन वह विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं
आपको बता दें कि दीपक प्रकाश वर्तमान में मंत्री हैं, लेकिन वह विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, किसी गैर-सदस्य को मंत्री बनने के छह महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना जरूरी होता है। इसी वजह से उनके मंत्री पद पर सवाल उठ रहे थे।

दीपक प्रकाश की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है
इस बीच, दीपक प्रकाश की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है। याचिका में दावा किया गया है कि बिना किसी सदन की सदस्यता के उन्हें दोबारा मंत्री बनाए जाने की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बिहार सरकार से जवाब मांगा है। अगर देवेश कुमार इस्तीफा देते हैं और दीपक प्रकाश उस सीट से विधान परिषद पहुंच जाते हैं, तो उनकी मंत्री पद पर बनी संवैधानिक अड़चन काफी हद तक दूर हो सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का असर आगे की स्थिति पर पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में मामला
हालांकि, दीपक प्रकाश का मामला अभी कानूनी विवाद में भी फंसा हुआ है। उनके मंत्री पद को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि दीपक प्रकाश विधानसभा या विधान परिषद, किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। ऐसे में उन्हें दोबारा मंत्री बनाए जाने की वैधता पर सवाल उठाया गया है। मामला संविधान के अनुच्छेद 164(4) से जुड़ा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब भी मांगा है।

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