पटना : बिहार बीजेपी की बड़ी समीक्षा बैठक खत्म होने के बाद पटना स्थित प्रदेश कार्यालय के बाहर एक अलग ही नजारा देखने को मिला। बैठक से बाहर निकलते ही बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी को पत्रकारों ने घेर लिया। अमूमन विवादों और शिकायतों से घिरे रहने वाले शिक्षा विभाग के मुखिया के चेहरे पर इस बार काम को लेकर एक खास संतोष और सुकून साफ दिखाई दे रहा था।
शिकायतें और फरियादें अब हुई बहुत कम
बातचीत की शुरुआत करते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि एक दौर वह भी था जब शिक्षा विभाग को लेकर हर तरफ से शिकायतें और फरियादें आती थीं। लोग दूर-दूर के जिलों से तबादले, रुके हुए वेतन और नियुक्ति की दिक्कतों की फाइलें लेकर पटना के चक्कर काटते थे। लेकिन अब वो स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
उन्होंने बताया कि अब विभाग से जुड़ी शिकायतें और परेशानियां बहुत कम आ रही हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि उन्होंने खुद जनता और शिक्षकों के बीच जाकर बातचीत का रास्ता खोला है। जब बातचीत का जरिया चालू रहता है, तो छोटी-छोटी दिक्कतें दफ्तरों में ही तुरंत सुलझ जाती हैं। इसी वजह से सारे पुराने मुद्दे धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं।
दिन में 3 बार मिलने का तय किया है समय
शिक्षकों और आम जनता के लिए मंत्री जी ने मिलने का जो टाइम-टेबल बनाया है, वह वाकई हैरान करने वाला है। मंत्री जी ने अपने काम करने का अनोखा शेड्यूल बताते हुए कहा कि वे रोजाना तीन शिफ्ट में लोगों से रूबरू होते हैं:
- सुबह 10 बजे: वे अपने सरकारी आवास पर आम जनता, शिक्षकों और अभिभावकों से सीधे मुलाकात कर उनकी शिकायतें सुनते हैं।
- शाम 4 बजे: वे अपने मंत्रालय और कार्यालय में उपस्थित रहकर विभागीय कार्यों के साथ-साथ सीधे मिलने आए लोगों से चर्चा करते हैं।
- रात 10 बजे से 2 बजे तक: दिनभर का काम निपटाकर आवास लौटने के बाद भी वे मिलने आए आखिरी व्यक्ति की बात सुने बिना अपनी कुर्सी से नहीं उठते हैं।
शिक्षकों के तबादले और वेतन पर लिया बड़ा एक्शनॉ
शिक्षकों के ट्रांसफर (तबादले), रुके हुए वेतन, पदस्थापन और पारिवारिक कारणों से जुड़ी व्यक्तिगत समस्याओं पर मंत्री ने कहा कि विभाग के पास जितने भी मामले आए थे, उनमें से अधिकांश का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जा चुका है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शिक्षक पूरी व्यवस्था की रीढ़ हैं। जब शिक्षक खुद दिमागी तौर पर निश्चिंत और खुश होकर स्कूल में बच्चों को पढ़ाएगा, तभी बिहार के छात्रों का भविष्य बेहतर बनेगा।
“हर भर्ती प्रक्रिया का मीडिया ट्रायल करना जरूरी नहीं”
पत्रकारों द्वारा TRE 4.0 (शिक्षक बहाली), कला और डांस शिक्षकों की भर्ती, भाषा विषयों का विवाद और ओबीसी (OBC) व एसटी (ST) सीटों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलनों का सवाल उठाने पर मंत्री का रुख काफी कड़ा था।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि हर भर्ती और हर प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए नियम पहले से ही बने हुए हैं और विभाग पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है। हर चीज का मीडिया ट्रायल करना जरूरी नहीं है। जो अभ्यर्थी सचमुच परेशान हैं और सीधे आकर अपनी समस्या बताते हैं, उनका समाधान निकाला जाता है। लेकिन जो लोग विभाग में आकर बात करने के बजाय केवल मीडिया के सामने बोलते हैं, उनकी मंशा और इरादों पर सवाल उठना बिल्कुल स्वाभाविक है।
‘ट्रेन छूटने’ वाले उदाहरण से अभ्यर्थियों को किया आश्वस्त
खबर के अंत में शिक्षा मंत्री ने आंदोलन कर रहे छात्रों को भरोसा दिलाया कि अब सभी अभ्यर्थी आश्वस्त होकर अपनी पढ़ाई में जुट गए हैं। जिन अभ्यर्थियों के सामने पहले कोई तकनीकी अड़चन थी, उनके लिए भी रास्ता निकाल दिया गया है।
उन्होंने रेलवे का एक सरल उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे यदि किसी स्टेशन पर किसी यात्री की ट्रेन छूट जाती है, तो रेलवे उसके लिए अगली ट्रेन या वैकल्पिक व्यवस्था करता है। ठीक उसी तरह, जिन अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा या फॉर्म भरने की प्रक्रिया में कोई जेनुइन दिक्कत आ रही थी, विभाग ने उनके लिए भी नए विकल्प तैयार कर दिए हैं ताकि किसी भी होनहार छात्र का कोई नुकसान न हो।
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