Motihari 138 Feet Mahaviri Flag: पूर्वी चंपारण के पताही प्रखंड स्थित जिहुली गांव में नागपंचमी के अवसर पर 138 फीट ऊंचा महावीरी झंडा लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आजादी के समय से चली आ रही इस परंपरा के तहत हर वर्ष गांव में भव्य महावीरी झंडे के साथ अखाड़े का आयोजन किया जाता है। इस बार भी आयोजन को लेकर ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। मुखिया नीकु सिंह के नेतृत्व में तैयार किए गए विशाल झंडे को खड़ा करने में सैकड़ों ग्रामीणों ने मिलकर मेहनत की। झंडा जैसे ही आसमान की ओर खड़ा हुआ, पूरा इलाका जयकारों और उत्साह से गूंज उठा।
नागपंचमी पर सदियों पुरानी परंपरा का आयोजन
जिहुली गांव में महावीरी झंडे और अखाड़े के आयोजन की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। आयोजन समिति के अनुसार, आजादी के समय से ही इस परंपरा को स्थानीय लोगों की ओर से आगे बढ़ाया जा रहा है। हर साल नागपंचमी के अवसर पर गांव में विशाल झंडा तैयार किया जाता है। इसके साथ अखाड़े का आयोजन भी होता है, जिसमें आसपास के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।
138 फीट ऊंचे झंडे ने खींचा लोगों का ध्यान
इस बार तैयार किया गया 138 फीट ऊंचा महावीरी झंडा आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। इतने बड़े झंडे को खड़ा करना आसान नहीं था। इसके लिए सैकड़ों ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से मेहनत की। झंडे के आसमान की ओर खड़े होते ही आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों में उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने जयकारे लगाए और पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन गया।
अखाड़े में युवाओं ने दिखाए पारंपरिक करतब
महावीरी झंडे के साथ आयोजित अखाड़े में युवाओं ने अपनी पारंपरिक कला और शारीरिक कौशल का प्रदर्शन किया। अखाड़े में लाठीबाजी, तलवारबाजी और विभिन्न पारंपरिक करतब दिखाए गए। युवाओं के प्रदर्शन को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आयोजन स्थल पर पहुंचे। दूर-दराज के इलाकों से भी लोग इस अनोखी परंपरा को देखने जिहुली गांव पहुंचे।
हिंदू-मुस्लिम समेत सभी वर्गों की भागीदारी
आयोजन की खास बात स्थानीय लोगों के अनुसार इसमें विभिन्न समुदायों और वर्गों के लोगों की भागीदारी है। हिंदू-मुस्लिम समेत सभी वर्गों के लोग सामाजिक सद्भाव के साथ आयोजन में शामिल होते हैं। आयोजन समिति इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और आपसी भाईचारे का प्रतीक मानती है। सामूहिक भागीदारी के कारण यह आयोजन स्थानीय स्तर पर खास पहचान रखता है।

महीनों की मेहनत और लाखों रुपये का खर्च
विशाल महावीरी झंडे को तैयार करने में महीनों की मेहनत लगती है। आयोजन समिति के अनुसार, झंडे के निर्माण और आयोजन में लाखों रुपये खर्च होते हैं। ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से हर साल इस परंपरा को आगे बढ़ाया जाता है। 138 फीट के विशाल झंडे और पारंपरिक अखाड़े ने इस बार भी जिहुली गांव के आयोजन को खास बना दिया है।
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