SIR IN UP : SIR के बाद यूपी में बचे 12 करोड़ 55 लाख वोटर्स, UP CEO ने दस्तावेजों के आधार पर होगा अपत्तियों का निस्तारण 

SIR IN UP : SIR के बाद यूपी में बचे 12 करोड़ 55 लाख वोटर्स, UP CEO ने दस्तावेजों के आधार पर होगा अपत्तियों का निस्तारण 

UP Voter List Updates : उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया के प्रथम चरण के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी किया गया है। जिसके बाद करीब तीन करोड़ वोटर्स के नाम कटे हैं। निर्वाचन आयोग ने कहा कि जिनका नाम लिस्ट में नहीं है वो आवश्यक दस्तावेज के साथ नाम जुड़वा सकते हैं।

6 जनवरी से 27 फरवरी तक दस्तावेजो के साथ पेश करे दावेदारी- मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा

उत्तर प्रदेश में एसआईआर के तहत पहले चरण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के अनुसार यूपी में करीब तीन करोड़ वोटर्स के नाम कटने के बाद कुल 12 करोड़ 55 लाख वोटर्स शेष बचे हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी UP नवदीप रिणवा ने बताया कि 6 जनवरी से 27 फरवरी के बीच दावों और आपत्तियों का निस्तारण होगा।

1.4 करोड़ वोटर्स को दस्तावेज दिखाने का मिला नोटिस 

गौरतलब हो कि कुल 81.30 प्रतिशत मतदाताओं ने ही फार्म भरे हैं और 18.70 % मतदाताओं ने फार्म जमा ही नही किया । जिसके चलते 2.29 करोड़ वोटर्स के नाम कटेंगे। लिस्ट के मुताबिक 2.17 वोटर्स स्थानांतरित हुये, जबकि 46.23 लाख वोटर्स के नाम कटेंगे। इसके अलावा 25.46 लाख वोटर्स ऐसे मिले जिनका नाम दो जगह होने के कारण हटाया गया । 83.73 लाख वोटर्स ऐसे हैं जो पलायन कर गये या कही और जाकर बस गये हैं। वहीं 9.57 लाख अन्य श्रेणी के मतदाताओं का भी नाम कटेगा । वहीं 1.4 करोड़ वोटर्स को नोटिस दिया गया है कि उन्हें अपना दस्तावेज दिखाना होगा। ऐसे लोग आयोग के द्वारा घोषित 13 दस्तावेजों में से कोई भी दिखा सकते हैं।

नाम जोड़ने और सुधार के लिये भरे फार्म 6 और फार्म 7 

UP CEO ने बताया कि मतदाता फार्म 6 के साथ आवश्यक दस्तावेज जमा कर नाम जुड़वा सकते हैं और फार्म 7 का उपयोग कर किसी तरह की सुधार को ठीक करवा सकते हैं। जिसके लिये 6 जनवरी से 27 फरवरी तक का समय दिया गया । जिसके बाद 6 मार्च को फाईनल वोटर लिस्ट जारी किया जायेगा।

जिनका नाम दो जगह उन्हें है परेशानी 

वहीं इतनी संख्या में वोटर्स के नाम कटने को लेकर सत्ता पक्ष के अंदर हलचल तेज हो गई है। इसमें ज्यादातर वोटर्स बीजेपी बहुल शहरी ईलाके के हैं जो बीजेपी के वोटर्स माने जाते हैं। ऐसे में बीजेपी के अंदर परेशानी बढ़ी हुई है।
जानकारों का मानना है कि ज्यादातर वोटर्स ऐसे हैं जिनका गांव के अलावा शहरों में भी घर है और गांवो में उनकी पुश्तैनी जमीन है। कुल लोगों में यह धारणा है कि शहर के वोटस लिस्ट में नाम होने से पुश्तैनी जमीन से हक खत्म हो जायेगा। जिसके चलते लोगों ने गावों में ही वोटर लिस्ट अपडेट करवा लिया है।

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