रांची: वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाने वाली अक्षय तृतीया इस वर्ष 30 अप्रैल को शुभ संयोगों के बीच मनाई जाएगी। भारतीय कालगणना के अनुसार, अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। इस दिन किए गए दान, पूजन, हवन और शुभ कार्यों का फल कभी समाप्त नहीं होता। इसे स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना गया है, जिसमें किसी भी शुभ कार्य की बिना किसी ज्योतिषीय गणना के शुरुआत की जा सकती है।
क्यों खास है यह दिन?
बीएचयू के पूर्व ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. गिरिजाशंकर शास्त्री के अनुसार, अक्षय तृतीया विश्वास और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक है। इसी तिथि पर त्रेतायुग का प्रारंभ हुआ था, इसलिए इसे ‘युगादितिथि’ भी कहा जाता है। इस बार तृतीया 29 अप्रैल को शाम 5:32 बजे शुरू होगी और 30 अप्रैल को दोपहर 2:15 बजे तक रहेगी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सूर्योदय व्यापिनी तिथि के आधार पर 30 अप्रैल को अक्षय तृतीया मनाई जाएगी।
खरीदी का महत्व
अक्षय तृतीया के दिन सोना-चांदी खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। पद्म पुराण के अनुसार, इसी दिन कुबेर को देवताओं का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इस दिन की गई खरीदारी जीवन में स्थायी समृद्धि और सौभाग्य लाती है। सोना और चांदी को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। ब्रह्मांड पुराण के अनुसार, उत्तर दिशा से सोना खरीदना अत्यधिक शुभ माना गया है।
10 महायोगों का दुर्लभ संयोग
पं. प्रफुल्ल भट्ट के मुताबिक, इस अक्षय तृतीया पर बुधवार का दिन और रोहिणी नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। इसके साथ ही पारिजात, गजकेसरी, केदार, काहल, हर्ष, उभयचरी और वाशी जैसे सात राजयोग, साथ ही सर्वार्थसिद्धि, शोभन और रवियोग भी बन रहे हैं। इन 10 महायोगों में कोई भी नया कार्य, निवेश या बड़ी खरीदारी दीर्घकालिक लाभ देने वाली होगी।
पिछली बार ऐसा दुर्लभ संयोग वर्ष 2008 में बना था और अगली बार 2052 में यह योग दोबारा बनेगा।
महत्वपूर्ण मुहूर्त
सोना खरीदी का मुहूर्त: सुबह 07:50 बजे से शाम 05:50 बजे तक
लक्ष्मी और सोने की पूजा का मुहूर्त: सुबह 07:50 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक
क्या करें इस दिन?
सोना, चांदी, वाहन, संपत्ति खरीदें
नए व्यापार या व्यवसाय की शुरुआत करें
दान-पुण्य और हवन करें
माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें


















