भाजपा ने रद्द करवाया अतिपिछड़ों का आरक्षण

Patna- नगर निगम निकायों में अतिपिछड़ा आरक्षण रद्द करने पर राजनीति तेज हो गयी है.

जदयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने इसे भाजपा और केन्द्र सरकार की साजिश बतलाया है.

उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा है कि अतिपिछड़ा आरक्षण को रद्द करने का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है,

आखिरकार अतिपिछड़ा समुदाय भाजपा की साजिश का शिकार हो ही गया.

अतिपिछड़ा आरक्षण रद्द होने पर राजनीति तेज

उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि एक का साजिश के तहत अतिपिछड़ों का आरक्षण रद्द करवा दिया,

क्योंकि यदि भाजपानीत केन्द्र सरकार जातीय जनगणना करवा चुकी  होती,

तो यह नौबत नहीं आती. आज उच्च न्यायालय के द्वारा अतिपिछड़ों का आरक्षण रद्द नहीं किया जाता.

लेकिन भाजपा एक साजिश के तहत जातीय जनगणना को टालती रही.

सामान्य सीट मान कर नोटिफिकेशन जारी करने का निर्देश

यहां बतला दें कि पटना हाईकोर्ट ने निकाय चुनाव में अतिपिछड़ों के आरक्षण पर रोक लगाते हुए

अतिपिछड़ों के लिए आरक्षित सीटों को सामान्य मान कर इन सीटों के लिए

फिर से नोटिफिकेशन जारी करने का निर्देश दिया है.

इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने कहा है कि यदि राज्य निर्वाचन आयोग चाहे तो

इसके चुनाव की तारीखों में परिर्वतन कर सकती है.

भाजपा ने इसके लिए जदयू को बताया जिम्मेवार

इधर भाजपा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ० निखिल आनंद ने कहा है

कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जानबूझकर पिछड़ा- अति समुदाय को धोखा दिया है.

भाजपा ने नीतीश कुमार की नियत पर सवाल उठाते हुए कहा है कि नीतीश कुमार को यह बताना चाहिए

कि इसलिए आयोग गठन करने की जिम्मेवारी किसकी थी.

बगैर तैयारी के चुनाव की प्रक्रिया क्यों शुरु की गयी.

बिहार का पिछड़ा अति पिछड़ा समाज इस बेइज्जती का बदला नीतीश कुमार से जरूर लेगी.

कोर्ट ने जतायी नाराजगी

पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि बिहार सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने पिछड़ों को आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया. हाईकोर्ट ने सबसे ज्यादा नाराजगी राज्य निर्वाचन आयोग पर जतायी है. राज्य निर्वाचन आयोग ही नगर निकाय चुनाव करा रहा है. हाईकोर्ट ने कहा कि बिहार का राज्य निर्वाचन आयोग अपने संवैधानिक जिम्मेवारी का पालन करने में विफल रहा.

नगर निकाय: तीन जांच की अर्हता हो पूरी

दिसंबर, 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि स्थानीय निकायों में ओबीसी के लिए आरक्षण की अनुमति तब तक नहीं दी जा सकती, जब तक कि सरकार 2010 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा निर्धारित तीन जांच की अर्हता पूरी नहीं कर लेती.

तीन जांच के प्रावधानों के तहत ओबीसी के पिछड़ापन पर आंकडे जुटाने के लिए एक विशेष आयोग गठित करने और आयोग के सिफरिशों के मद्देनजर प्रत्येक स्थानीय निकाय में आरक्षण का अनुपात तय करने की जरूरत हैं. साथ ही ये भी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि एससी/एसटी/ओबीसी के लिए आरक्षण की सीमा कुल उपलब्ध सीटों का पचास प्रतिशत की सीमा को नहीं पार करें.

ट्रिपल टेस्ट के पेच में फंसा अतिपिछड़ों का आरक्षण

अतिपिछड़ों से झूठी हमदर्दी नहीं दिखलाये भाजपा

SIR Verification में बड़ा खुलासा, बरहरवा में 200 रुपये लेकर बनाए...

बरहरवा में SIR दस्तावेज सत्यापन के दौरान चार फर्जी निवास प्रमाण पत्र मिले। 200 रुपये लेकर प्रमाण पत्र बनाने के आरोप में पांच लोगों...

Weather Update: रांची में बारिश थमी तो बढ़ा तापमान, 8 सितंबर...

रांची में बारिश थमने के बाद तापमान बढ़ा है। 8 सितंबर से मौसम बदलने के आसार हैं। 9 सितंबर को झारखंड के सात जिलों...

Giridih News: झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन, देर...

झारखंड के कैबिनेट मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो गया। देर रात अचानक सीने में दर्द के बाद अस्पताल में...