पलामू : नावा बाजार के पूर्व थाना प्रभारी लालजी यादव की आत्महत्या को लेकर अब राजनीतिक उठापटक भी शुरू हो गई है. भारतीय जनता पार्टी और झारखंड मुक्ति मोर्चा के बीच बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है. पलामू से भाजपा सांसद बी डी राम राम और पांकी विधायक डॉ. शशिभूषण मेहता के बयान पर झामुमो ने कड़ा एतराज जताया है. इन लोगों ने लालजी यादव की हत्या की बात कही थी. इसके जवाब में झामुमो नेता संजीव तिवारी और सुनील तिवारी ने प्रेस कांफ्रेंस कर भाजपा पर हमला बोला. उन्होने भाजपा पर सीधे-सीधे सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया. झामुमो नेताओं ने कहा कि पहले भी भाजपा हत्या-आत्महत्या के मामलों को लपक कर अपना मुद्दा बनाती रही है और इस बार भी वही कर रही है. उन्होने कहा कि ऐसे मामलों को संजीदगी से लेने की जरूरत है लेकिन भाजपा लोगों को भड़काने का काम कर रही है.
निलंबन के चार दिन बाद दारोगा ने की आत्महत्या
पलामू जिले के नावाबाजार थाने के दारोगा लालजी यादव ने अपने सस्पेंशन के चार दिन बाद 10 जनवरी (सोमवार) की रात थाना परिसर में आत्महत्या कर ली. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस उपमहानिरीक्षक राजकुमार लकड़ा व एसपी चंदन सिन्हा थाने में पहुंचे और कारणों की जांच शुरू की. इधर, आस-पास के लोग थाने के बाहर जमा हो गए और सस्पेंशन ऑर्डर जारी करने वाले एसपी सिन्हा के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. लोगों ने घंटों सड़क जाम रखा. कमरे से सुसाइड नोट भी नहीं मिला है. मूल रूप से साहिबगंज के रहनेवाले लालजी अपने पीछे पत्नी पूजा, दो छोटे बच्चे छोड़ गए हैं.
क्यों हुआ था सस्पेंशन
5 जनवरी की रात पलामू के परिवहन पदाधिकारी अनवर हुसैन ने एसपी सिन्हा से शिकायत की थी कि जब्त वाहनों को नावाबाजार के थाना प्रभारी लालजी यादव नहीं ले रहे हैं. एसपी ने दारोगा लालजी को सहयोग का निर्देश दिया. फिर भी उन्होंने ऐसा नहीं किया. इसके बाद एसपी ने छह जनवरी को दारोगा लालजी को सस्पेंड कर दिया.
रिपोर्ट: संजीत
Nalanda-होटल के कमरे में मिली प्रेमी प्रेमिका की लाश, जानिये आत्महत्या की वजह


















