Chaiti Chhath 2026: नहाय-खाय से शुरू महापर्व, जानें अर्घ्य का समय, शुभ योग और व्रत का महत्व

 चैती छठ 2026 नहाय-खाय से शुरू, 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य। जानें खरना, संध्या अर्घ्य समय और शुभ योग।


Chaiti Chhath 2026 रांची: चैती छठ महापर्व रविवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है और 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न होगा। चार दिनों तक चलने वाले इस पवित्र पर्व में श्रद्धालु कठिन व्रत रखते हुए सूर्य देव और छठी मइया की उपासना करते हैं। राजधानी समेत पूरे झारखंड और बिहार में इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।

इस दौरान व्रती महिलाएं और पुरुष नियम, संयम और आस्था के साथ पूजा-अर्चना करते हैं, जिससे परिवार में सुख-समृद्धि और संतानों की कामना पूरी होने की मान्यता है।

Chaiti Chhath 2026: नहाय-खाय से शुरू, जानें पूरा कार्यक्रम और समय

चैती छठ के पहले दिन नहाय-खाय से व्रत की शुरुआत होती है। इसके बाद दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन प्रातः अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।

  • 22 मार्च: नहाय-खाय
  • 23 मार्च: खरना (रात 8:42 बजे से पहले)
  • 24 मार्च: संध्या अर्घ्य (सूर्यास्त 6:00 बजे)
  • 25 मार्च: प्रातः अर्घ्य (सूर्योदय 5:49 बजे)

श्रद्धालु इन निर्धारित समय पर पूजा कर छठी मइया का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

Chaiti Chhath 2026: इस बार बन रहे विशेष शुभ योग

ज्योतिषाचार्य शालिनी वैद्य के अनुसार, इस वर्ष चैती छठ में कई शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो इस पर्व को और भी खास बना रहा है।

  • नहाय-खाय के दिन भरणी नक्षत्र और रवि योग
  • खरना के दिन कृतिका नक्षत्र और यायीजय योग
  • संध्या अर्घ्य के दिन रोहिणी नक्षत्र और प्रीति योग
  • प्रातः अर्घ्य के दिन मृगशिरा नक्षत्र, आयुष्मान योग और सर्वार्थ सिद्धि योग

इन शुभ योगों में किया गया व्रत और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।


Key Highlights

  • चैती छठ महापर्व नहाय-खाय से शुरू, 25 मार्च को समापन

  • खरना, संध्या अर्घ्य और प्रातः अर्घ्य का निर्धारित समय जारी

  • इस बार छठ में कई शुभ योगों का विशेष संयोग

  • नवरात्र के साथ होने से बढ़ा धार्मिक महत्व

  • व्रत से सुख, समृद्धि और संतान प्राप्ति की मान्यता


Chaiti Chhath 2026:देवी स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व

चैत्र नवरात्र के साथ पड़ने के कारण इस बार छठ पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। नहाय-खाय के दिन मां कूष्मांडा, खरना के दिन स्कंद माता, संध्या अर्घ्य के दिन मां कात्यायनी और प्रातः अर्घ्य के दिन मां कालरात्रि की पूजा का विधान है।

ऐसे में जो श्रद्धालु चैती छठ का व्रत रखते हैं, उन्हें छठी मइया के साथ-साथ इन देवी स्वरूपों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Chaiti Chhath 2026: व्रत का महत्व और मान्यता

चैती छठ व्रत को अत्यंत कठिन और पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से बल, आरोग्य, समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से संतान की कामना करने वाली महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत शुभ माना गया है।

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