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30 साल पुराने विवाद में सिविल कोर्ट का बड़ा फैसला, जल संसाधन विभाग में लगा ताला, जानें पूरा मामला

Deoghar: देवघर में गुरुवार को सिविल कोर्ट ने एक अनोखा आदेश जारी करते हुए झारखंड सरकार के जल संसाधन विभाग में तालाबंदी करा दी। यह फैसला उन निविदा कर्मियों के पक्ष में दिया गया, जिन्हें वर्ष 1996 में बिना किसी कारण नौकरी से हटा दिया गया था। इस अभूतपूर्व कदम के बाद विभाग का कार्यालय बंद कर दिया गया और कर्मचारी अपने बकाया भुगतान की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए।

20 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाईः

निविदा पर काम कर रहे पंप खलासी, ड्राइवर, चपरासी और नाइट गार्ड जैसे दर्जनों कर्मचारियों ने वर्ष 1996 में अपनी नौकरी गंवाने के बाद अदालत का रुख किया था। लगभग 20 वर्षों की कानूनी जद्दोजहद के बाद 2014 में देवघर श्रम न्यायालय ने उनके पक्ष में निर्णय सुनाते हुए विभाग को सभी बकाया राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया। विभाग ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन वहां भी श्रम न्यायालय के आदेश को सही ठहराया गया। इसके बावजूद पिछले 10 वर्षों में विभाग ने एक भी कर्मचारी को भुगतान नहीं किया।

कोर्ट ने कहा—भुगतान तक रहेगा तालाः

अदालत ने गुरुवार को कठोर रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया कि जब तक सभी निविदा कर्मियों का बकाया भुगतान नहीं हो जाता, तब तक जल संसाधन विभाग का कार्यालय बंद रहेगा। इस आदेश के बाद कर्मचारियों ने कार्यालय में तालाबंदी कराई और न्याय की मांग के लिए आवाज बुलंद की।

कर्मचारियों की तकलीफ: 30 साल से हक के लिए संघर्ष

पीड़ित कर्मचारी जगत नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि वे 1976 से विभाग में सेवा दे रहे थे। नियुक्ति स्थायी करने की मांग की, लेकिन 1996 में अचानक सभी को नौकरी से हटा दिया गया, बकाया वेतन भी जारी नहीं किया गया। तीन दशक से अधिक संघर्ष के दौरान कई कर्मचारी गुजर चुके हैं, जबकि बाकी बुजुर्ग हो चुके हैं और अपनी जीवन भर की मेहनत की कमाई के इंतजार में हैं।

वकील का बयानः

कर्मचारियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विवेकानंद ने बताया कि श्रम न्यायालय और हाईकोर्ट—दोनों ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला दिया, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं हुआ। इसलिए कोर्ट को विभाग की तालाबंदी का आदेश देना पड़ा।

कर्मचारियों में गहरा आक्रोशः

कर्मचारियों का कहना है कि कोर्ट का आदेश आने के 11 साल बाद भी भुगतान न होना राज्य के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब बुजुर्ग ही अपने अधिकार के लिए दर-दर भटकेंगे, तो युवा पीढ़ी का मनोबल कैसे बढ़ेगा? अब सभी कर्मचारी जल्द से जल्द अपने बकाया वेतन और सेवा लाभ की मांग कर रहे हैं और न्याय मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।

 

 

 

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