चंद्रयान 3 के उपकरण बनाने वाले एचईसी कर्मी उतरे सड़कों पर कहा,18 माह से नही मिला वेतन

रांची: चंद्रयान-3 के सफल लैंडिंग के बाद झारखंड के लोगों का सीना गर्व से चोडा हो गया था,गर्व करे भी क्यों न चंद्रयान 3 ने जिस लॉन्चिंग पैड से उड़ान भरा था.

उसका डिजाइन रांची एचईसी के किया गया था.लेकिन जिसने चंद्रयान 3 को बनाने में योगदान दिया वही लोग सड़क पर अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन करने पर मजबूर हो गए है.आज एचईसी बचाओ मजदूर जन संघर्ष समिति की ओर से रांची के राजभवन के समक्ष एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया.

बता दे कि एचईसी के कर्मियों को सहयोग करने के लिए इंडिया गठबंधन के घटक दल मौजूद रहे. वही मौके पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि इंडिया गठबंधन के सभी घटक दल एचईसी कर्मियों के हक दिलाने में इनका सहयोग करेंगे.

और जो भी बकाया वेतन है ,उसे केंद्र सरकार से भुगतान करवाने की मांग करेंगे,साथ ही राजेश ठाकुर ने कहा कि इंडिया गठबंधन प्रतिबद्ध है और एचईसी कर्मीयों के साथ है और इन्हें बहुत जल्द वेतन मिल जाएगा.

एचईसी के कर्मी बताते है कि उन्हें पिछले 18 महीना से वेतन नहीं मिला है और ना ही इस पर केंद्र सरकार कोई पहल कर रही है.

कर्मियों का आरोप है कि केंद्र सरकार के गलत नीतियों के कारण एशिया का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग उद्योग जिसे मातृ उद्योग के नाम से जाना जाता है यह आज बंद कगार पर है जो देश के औद्योगिक विकास के महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ अरबो रुपए का विदेशी मुद्रा का बजट किया है.

यह देश का रक्षा अनुसंधान, मीनिंग, इस्पात विद्युत, रेलवे,और अन्य संयत्रों के अनेकों उपकरण बनाया है ऐसे महत्वपूर्ण कारखाना दूसरी इस देश में नहीं बनाया जा सकता इसलिए देशहित में इसे बचना जरूरी है अन्यथा अगर बंद होता है तो इस क्षेत्र की पूरी आबादी प्रभावित हो जाएगी लोगों का भविष्य अधर में लटक जाएगा.

एचईसी को बचाना है इसी नारे के साथ एचईसी के सभी कर्मी लगातार आंदोलन कर रहे हैं. यहां के कार्यरत सभी ट्रेड यूनियने , राजनीतिक दलों सामाजिक संगठनों विस्थापित संगठन झोपड़ी बचाओ संगठन सेवा निर्मित कर्मचारियों का संगठन महिला संगठन बुद्धिजीवी वर्ग सभी इसको बचाने में लगे हुए हैं.

कर्मी बताते है कि पिछले 18 माह से हमें वेतन नहीं मिला है लेकिन फिलहाल एचईसी को बचाना है इसलिए 18 माह से बगैर वेतन के यानी भूखा रहकर भी चंद्रयान-3 का लांचिंग पैड निर्माण कर देशभक्ति का परिचय दिया है फिर भी केंद्र सरकार ना तो एसएससी की चिंता है और ना ही यहां के कर्मचारियों की चिंता है इसलिए कर्मियों को मरने के लिए छोड़ दिया है.

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