Ranchi- सरना धर्म कोड-अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के रांची महानगर अध्यक्ष पवन तिर्की ने कहा
कि झारखंड में आदिवासियों का अस्तित्व खतरे में है.
राज्य की हेमंत सरकार सरना धर्म कोड को लेकर गंभीर नहीं है.
उन्होंने राज्य सरकार के जल्द से जल्द इसे लागू करने का आग्रह करते हुए कहा
कि आदिवासी समाज इस मसले पर चुप नहीं बैठेगा.
हम मां चाला से प्रार्थना करते है कि वह जल्द से जल्द हेमंत सरकार को सद्बुद्धि दे.
सरना धर्म कोड को लेकर आन्दोलन की चेतावनी
यहां बता दें आज कोनका मौजा सरना समिति,
रांची की ओर से सरना झण्डा बदली का कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.
इस अवसर पर डोम टोली, बसर टोली, चुनवा टोली, टम टम टोली, गढा टोली,
नया टोली, डोमसा टोली, कटहल टोली, पत्थल कुदवा, चुटिया,
गुगु टोली, भुईयां टोली आदि करीबन बारह गांव के ग्रामीण शामिल हुए.
मौजा के पाहन घाघु किस्पोट्टा और परनो किस्पोट्टा की
अगुवाई में सरना झण्डा को लेकर डोम टोली, कर्बला चौक से पुरुलिया रोड़,
कोनका मौजा स्थल तक पैदल मार्च करते हुए सरना स्थल लाया गया.
यहां झण्डे को पुरे रीति रिवाज के साथ पूजा अर्चना कर उसकी स्थापना की गयी.
इस अवसर पर पाहन ने कहा कि
सदियों से हमारे पुरखों के द्वारा हर साल इस महीने मे सरना स्थल का झण्डा बदली किया जाता है.
हम धर्मेश मां और चाला आयो से प्रार्थना करते हैं कि मौजा के साथ ही राज्य कि
इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से मौजा के पाहन घाघु किस्पोट्टा और परनो किस्पोट्टा,
कोली टोप्पो, अनिल किस्पोट्टा, प्रदीप कुजुर, पवन तिर्की,
आकाश तिर्की, राकेश तिर्की,बिलयानी कच्छप, अनिल कच्छप, सुनिता टोप्पो, रत्ना केरकेट्टा,
सन्नी मिंज, सोमरा कच्छप,सुजाता तिर्की,मीना खलखो
पर्वती तिर्की,फुलो गाड़ी, गुड़िया गाड़ी, सीता हेमरोम,
सुनिता तिर्की,गगीया तिर्की, सारो सांगा,जोवना तिर्की, तारा कुजुर की मौजूदगी रही.
सरना धर्म कोड और संताली को राजभाषा बनाने को लेकर दिल्ली में आदिवासी-मूलवासियों का महाजुटान

















